
कोटा। वल्लभबाड़ी स्थित श्री जैन दिवाकर पावन तीर्थ पर जैन दिवाकरीय उपाध्याय श्री मूलचंद जी महाराज साहब के प्रथम पुण्य स्मरण महोत्सव में आज चतुर्थ दिवस पर महासती श्री सुदर्शना जी म.सा. ने फरमाया कि महापुरुष इस धरा पर जन्म लेकर स्वय के जीवन को तो धन्य बनाते ही है साथ ही जन्म मानस को भी धन्य बनाते है। उपाध्याय भगवन का जीवन इंद्रधनुष की तरह था। इसलिए हमे उनके गुणों को आत्मसात कर अपने जीवन को उच्च शिखर पर ले जाने का प्रयास करे।
इस अवसर उप प्रवर्तक श्री राकेश मुनि जी म सा ने कहा कि उपाध्याय भगवन गद्य पद्य, लेखक और कई शब्दो को मिलाकर एक शब्द बना देते थे। उन्होंने कई ऐतिहासिक चातुर्मास किए। कोटा चातुर्मास में उन्होंने एक ऐतिहासिक काव्य की रचना की। इस अवसर पर आज के दिन अन्न त्याग तपस्या करवाई गई। लगभग १२३ श्रावक श्राविकाओं ने इसका लाभ लिया।
तपस्या की कड़ी में तपस्विनी बहन पिंकी जैन ने आज 56 उपवास के पचखान लिए। आज के कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में (कोटा दक्षिण) के विधायक श्री संदीप जी शर्मा पधारे। उन्होंने कहा यह वह स्थल है जहां सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा संतो के सान्निध्य से ही हमारी युवा वर्तमान पीढ़ी संसकारवान बन सकती है। महिला मंडल की ओर से आज के कार्यक्रम में ग्रीन कलर की थीम रखी गई, साथ ही भजन प्रस्तुत किया गया,तथा फायरलेस कुकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।