456 वां दिवस : सिंह निष्क्रीङित व्रत (उत्तम) प्रसन्न उत्सव निर्विघ्न पारणा हुवा रविवार, 557 दिन की मौन साधना

सम्मेद शिखर जी । तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम आचार्य श्री अन्तर्मना प्रात: स्मरणीय आचार्य श्री 108 परम पूज्य प्रसन्न सागर जी महाराज गुरुदेव जी की 21 जुलाई 2021 से मौन साधना प्रारंभ हुई है जो 28 जनवरी 2023 तक रहेगी। आचार्य श्री 496 उपवास ओर 61 दिन की आहार ग्रहण करेंगे अपने जीवन को धन्य किया । गुरूदेव ने अपनी मौन साधना से दीपावली ओर निर्वाण महोत्सव पर अपनी मौन वाणी से बताया कि चेहरे से पहचान होती है और चरित्र से परख दिवाली यानी अंधकार से प्रकाश की ओर दु:ख से सुख की ओर, पाप से पुण्य की ओर । दिवाली पर्व हमें आत्मिक सुख की प्रेरणा देता है। दिवाली पर असत्य से सत्य की राह बताता है,इसलिये रात जितनी काली होगी सुबह उतने ही करीब होगी। भगवान महावीर के निर्वाण हमारे जीवन में तभी फलीभूत होगा, जब हम उनके पथानुगामी बनेंगे और उनके संदेश को आत्मसात करेंगे ।आज भगवान महावीर स्वामी के 83 लाख 99हज़ार 999 योनियों से मुक्ति प्राप्त की और जाते-जाते अमृत संदेश दे गए -जियो और जीने दो। इस एक वाक्य से सभी धर्मों का मार्ग समाहित हो गया । दिवाली पर हम किसी का बुरा नहीं करने का संकल्प लें । दिवाली पर हम अपनी एक बुराई का तपरणर करें । दिवाली पर हम विवेक बुद्धि से कार्य करें। दिवाली पर अमानवीय सेवा को सम्मान दें और प्रेम करुणा सेवा भाई चारे का अखंड दीप जलाएं और क्रूरता निष्ठुरता अमानवीयता की हवा से दीप को बचाये । सौम्यमूर्ति श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज ससंघ बीसपंथी कोठी पारसनाथ में विराजमान हैं । उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, मनीष सेठी ने दी।

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