विनय सरलता और समता सिखाता है, अकड़ कभी नही सिखाता – श्रमण संघीय प्रर्वतक श्री प्रकाशमुनिजी मसा

श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में मनी आनंदऋषि जयंती

रतलाम12 अगस्त। धर्म में प्रवेश की पहली शर्त है – झुकना। अध्यात्म में विनय पहले चाहिये। नवकार महामंत्र में भी पहला शब्द – नमो अरिहंताणं है, जिसका तात्पर्य पहले झुको, फिर भगवान का नाम लो। शरीर का सर्वश्रेष्ठ अंग सिर झुकना चाहिये। सिर के साथ गर्दन और मुँह मुखिया है। मुखिया झुकने पर ही व्यक्ति धर्म में प्रवेश कर सकता है।
यह बात रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि पुराने जमाने में राज दरबार में जाने के पहले झुकने का नियम था। घर के दरवाजे भी छोटे होते थे, जिससे घर में आने वाले को झुककर ही आना पडता था। आजकल दरवाजे बडे हो गए है और लोग अकड़कर आते तथा अकड़कर ही जाते हैं। ये पैसे की अकड़ विनय से दूर कर रही है। जबकि विनय सरलता और समता सिखाता है, अकड़ कभी नही सिखाता। व्यवहार में झुकना महत्वपूर्ण है। धर्म में तो विनय और नमन को सर्वाधिक महत्व दिया गया है, इसलिए झुकने से परहेज नहीं करना चाहिए।
मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य प्रवर्तकश्री ने कहा कि सामायिक में भी विनय-नमन जरूरी है। श्रद्धा के साथ किया जाने वाला कर्म ही मोक्ष का मार्ग बनता है। उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। इस मौके पर आनंदऋषिजी की जयंती मनाई गई। 100 से अधिक गुरूभक्तों ने एकासन तप किया। प्रवर्तकश्री से तपस्वियों ने विभिन्न तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा में इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री रखब चत्तर ने किया। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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