पूज्य अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का आज 417 वाँ दिन के मौन उपवास में 54 वॉ निरन्तराय आहार हुवा

सम्मेदशिखर जी । आज 10 नवंबर को तीर्थराज सम्मेदशिखर जी मे अन्तर्मना के पारणा निर्विघ्न हो इसके लिए बिसपंथी कोठी में प्रथम बार स्वर्णमय 1008 श्री धर्म नाथ भगवान का सौम्य मूर्ति पूज्य मुनि 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के सानिध्य में अभिषेक ओर विशेष शांतिधारा दिलीप-सुनीता हुम्मड परिवार बड़ोदरा के द्वारा किया गया । इसके पश्चात जैन धर्म के सबसे कम उम्र के तपस्या में रत सिंह निष्क्रिय व्रत धारण करने वाले पूज्य अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का 557 दिन के मौन साधना में 60 दिन आहार ग्रहण करने की श्रृंखला में आज 417 वाँ दिन के मौन उपवास में 54 वॉ निरन्तराय आहार हुवा।
अन्तर्मना मुनि श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज 8 महीना पर्वत राज पर मौन साधना और एकांत में रहते हुवे कर अभी बीस पंथी कोठी में विराजमान है जहाँ आज 10 दिनों बाद पारणा हुवा।
इस पारणा में मधुबन में विराजमान आचार्य श्री 108 विसद सागर जी मुनिराज, आचार्य श्री 108 प्रमुख सागर मुनिराज,आचार्य श्री 108 कुलभद्र नंदी जी मुनिराज,आचार्य श्री 108 निरंजन सागर जी मुनिराज,मुनि श्री 108 पुण्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 मोक्ष सागर जी महाराज अन्तर्मना शिष्य सौम्य मूर्ति मुनि श्री 108 पीयूष सागर जी महाराज के साथ लगभग 51 पीछी धारी मुनिराज,आर्यका के मंगल सानिध्य में आज आहार सम्पन्न हुआ ।इस अवसर पर विशेष रूप से हैदराबाद के जैन मनोज चौधरी,भोपाल के बिट्टू जैन,लालगोला से जैन मनोज छाबडा,धूलियांन से मनोज जैन,अजय जैन,कोडरमा से जैन राज कुमार अजमेरा,आयुष जैन शामिल हुवे। उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा ने दी ।

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