श्री दिगंबर जैन समाज के द्वारा आयोजित, तीन दिवसीय सार्वजनिक दिव्य प्रवचन श्रृंखला में शहर के सैकड़ों श्रद्धालु भक्त शामिल हुए

झुमरीतिलैया । श्री दिगंबर जैन समाज के द्वारा आयोजित, तीन दिवसीय सार्वजनिक दिव्य प्रवचन श्रृंखला में शहर के सैकड़ों श्रद्धालु भक्त शामिल हुए मंच संचालन चातुर्मास संयोजक सुरेंद्र काला ने किया, मंगलाचरण नवीन पंड्या ने किया।
पानी टंकी रोड स्थित जैन मंदिर में जैन संत विशल्य सागर जी गुरुदेव ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि अगर आप वाकई में प्रसन्नता और शांति पाना चाहते हैं तो मन को बदलें, मन की दिशा और परिणामों को बदलें। जीवन में जो मिले उसे प्रेम से स्वीकार करें।एक व्यक्ति मिठाई की दुकान पर गया और पूछा-‘ तुम्हारे यहाँ सबसे अच्छी मिठाई कौन सी है ? हलवाई ने अपने यहां की हर मिठाई को एक दूसरे से अच्छा बताया।उस व्यक्ति ने कहा-‘मैं तो यह जानना चाहता हूं कि कौन सी मिठाई सबसे अच्छी है ?’ ‘महाशय ,मेरी दुकान की हर मिठाई सबसे अच्छी है ‘ -हलवाई ने कहा। जिंदगी भी एक दुकान की तरह है जिसकी हर चीज अच्छी है। जो भी जैसा मिल रहा है उससे कैसा गिला, कैसी शिकायत।
तुम दु:खी हो ,क्योंकि तुम जो चाहते हो ,पसंद करते हो वह तुम्हें नहीं मिल पा रहा है।प्रसन्न रहने की कला तो इसमें है कि तुम्हें मिल रहा है उसी को पसंद करना शुरू कर दो।ईश्वर हमें वह सब नहीं देता, जो हम चाहते हैं। जो ईश्वर ने दिया है,हम उसे पसंद करना शुरू कर दें। हम सदा खुश रहेंगे सुख और दुख दोनों का सम्मान करो ।अगर आप अपने मन को इस दिशा में मोड़ने या बदलने में सफल हो जाते हैं तो प्रसन्नता अपने आप आएगी।प्रसन्नता उधार या किराए से नहीं मिलती। लोग हमारे पास आते हैं और कहते हैं -कोई ऐसा मंत्र बताइए कि जिससे मन को प्रसन्नता और शांति मिले।’ मैं कहता हूं- -दुनिया में कोई भी ऐसा मंत्र नहीं है जिसको जपने से शांति पाई जा सके। शांति पाने का एक ही मार्ग है कि आप अशांति के निमित्तों से बचने की कोशिश करें ।आपने अपने अपने चारों ओर अशांति के इतने निमित्त खड़े कर लिए हैं कि उनके बीच शांति दफन हो गई है ।चेहरे की मुस्कान भी कृत्रिम हो गई है जिसके कारण बाहर से तो व्यक्ति सुखी नजर आता है लेकिन अन्तर्मन में वह दुःखी ही है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि शालिनी गुप्ता जी ने कहा कि हमारे शरीर की सुंदरता अच्छे कर्म और अच्छे कार्यों से ही दिखाई देती है जो मनुष्य त्याग तपस्या समाज सेवा करता है वही सुंदर और प्रसन है जैन संत इस दुनिया में चलते फिरते भगवान है उनके द्वारा किया जाने वाला कठिन त्याग तपस्या अकल्पनीय है, जैन समाज के पदाधिकारियों के द्वारा मुख्य अतिथि शालिनी गुप्ता को दुपट्टा पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया
मौके पर भारत विकास परिषद के रामप्रवेश पांडे ,छोटेलाल पांडे, कुंज बिहारी त्रिवेदी, पत्रकार अरुण ओझा ,अरविंद चौधरी सुषमा सुमन ,आदि कई समाज के लोग उपस्थित थे कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम के संयोजक संजय ठोलिया , मंत्री ललित सेठी ,सुशील छाबड़ा जयकुमार गंगवाल, सुनील छाबड़ा आदि ने सहयोग प्रदान किया यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन राजकुमार अजमेरा ने दी।

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