प्रतापगढ़ आनंद भवन 27 नवंबर 2022 । बाहरी उपासना पद्धति धर्म का मात्र साधन है उपासना पद्धति को धर्म मान लेना अज्ञानता का प्रतीक है । उक्तविचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि सभी धर्मों की उपासना पद्धति में क्षेत्र कॉल क्षेत्र के अनुसार भिन्नता होने के बावजूद सभी का लक्ष्य मानवीय गुणों से ओतप्रोत होना है।
उन्होंने कहा कि उपासना पद्धति को लेकर किसी को ऊंचा नीचा मानना कम ज्यादा मूल्यांकन करना धर्म का अपमान करने के समान है । कमलेश ने कहा कि धर्म की ओट में धर्म के नाम पर टकराव कट्टरता फिरका परस्ती नफरत अपने आप में हिंसा की जननी है अधर्म और पाप है । राष्ट्र संत ने बताया कि विश्व के सभी महापुरुषों ने सद्भाव और प्रेम को ही धर्म प्राण बताया है इस के अभाव में की गई साधना मुर्दे को श्रृंगार कराने के समान है । जैन संत ने बताया कि मानव से मानव को जोड़ें वही धर्म महान है और मानवता के टुकड़े करें वह कसाई से भी खतरनाक है । मूर्तिपूजक पीयूष विजय जी म.सा. ने कहा कि दिल में प्रेम का निवास होगा तभी परमात्मा से मुलाकात होगा ।
शासन प्रभावक भव्य मुनि ने कहा कि धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं तोड़ता है तोड़ता वह तो पाखंड है मूर्ति पूजा को स्थानकवासी संतोके मधुर मिलन से युवाओं में पूरे जोश का संचार हुआ जैन एकता जिंदाबाद के नारे लगे उदयपुर मंदसौर गुलाबपुरा विजयनगर छोटी सादड़ी उत्तर प्रदेश क्षेत्रों के लोगों ने सेवा का लाभ लिया 1 दिसंबर को आकोदड़ा मध्यप्रदेश में 100 बीघा जमीन में मुनि कमलेश के सानिध्य में गौशाला का उद्घाटन होगा जिसमें कलेक्टर एसपी विधायक मंत्री कई जनप्रतिनिधि भाग लेंगे