सहकार भारती स्थापना दिवस मनाया गया
रतलाम। सहकार भारती ने ईमानदार नेतृत्व को तैयार किया है,लेकिन प्रदेेश में सहकारी संस्थाओं के चुनाव नहीं होने से नेतृत्व को जनता की सेवा करने का मौका नहीं मिल रहा है और सहकारी क्षेत्र में हताशा का माहौल है। मध्यप्रदेश सहकारी अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि छ: माह से अधिक समय तक प्रशासक को नियुक्त नहीं रखा जा सकता,किन्तु नियमों की अनदेखी कर अपेक्स बैंक से लेकर पेक्स सोसायटियों व अन्य सहकारी संस्थाओं के निर्वाचन नहीं करवाए जा रहे है, इससे सहकारिता में लोकतांत्रिक ढांचा खत्म होता जा रहा है।
यह विचार सहकार भारती मालवा प्रांत के पूर्व उपाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी शरद जोशी ने सहकार भारती के 45 वें स्थापना दिवस केे अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिवेश में सहकारी संस्थाओं की भूमिका और अधिक प्रसांगिक हो चुकी है। सहकारी संस्थाएं ही है जो रोजगार उपलब्ध करवा सकती है तथा पुंजीवादी व्यवस्था के नुकसान से देश को बचा सकती है। सहकार भारती ने सहकारिता के जमीनी कार्यकर्ताओं को जोडक़र एक श्रैष्ठ संगठन तैयार किया है। आज महत्ती आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में सहकार भारती सहकारी संस्थाओं के चुनाव शीघ्र कराने की मांग को लेकर आंदोलनरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करतेे हुए जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अशोक जैन चोटाला ने कहा कि वर्षों से सहकारिता के क्षेत्र में अपना समय देने वाले नेता कार्यकर्ताओं को वर्तमान दौर में नजर अंदाज कर दिया गया है। इन्ही कार्यकर्ताओं के बल पर प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित हुए है। उन्होंने भी सबसे बड़ा किसान सम्मेलन रतलाम में आयोजित कर सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए कदम उठाया था, लेकिन आज यह आंदोलन अधिकारियों के हाथों में जाने से सहकारिता आंदोलन की रफ्तार कम हो गई है। उन्होंने कहा कि सहकारिता एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जिसमें कम पूंजी के साथ ही बहुत सारे लोग अपना बहुत बड़ा योगदान दे सकते है। गुजरात में अमूल, इफ्को, इंडियन कैफे हाउस जैसी संस्थाएं इसका उदाहरण है।
जिला उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष सुरेन्द्रजोशी मुन्ना ने कहा कि अब सहकारी आंदोलन के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं होना चाहिए। इसमें पारदर्शिता लानी चाहिए। सहकारिता को वर्तमान प्रतिस्पर्धा के साथ जिने का स्वभाव बनाना होगा तभी कॉपरेटिव को आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने सहकारी संस्थाओं के संचालन में आ रही परेशानी का भी जिक्र किया।
स्वागत भाषण देते हुए सहकारी भारती के जिलाध्यक्ष गोपाल परमार ने कहा कि सहकारिता को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर नई योजनाएं तैयार की गई है, जिसमें प्रत्येक ग्राम स्तर पर ग्रामीण औद्योगिक सहकारी समिति के गठन का प्रस्ताव है। सहकारी भारती भी जिले में सहकारी समितियों के गठन को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी इकाईयों को समय-समय पर निर्देश देती है। आवश्यक हुआ तो सहकारी समितियों के गठन को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएगी।
नगर पालिका निगम के पूर्व सभापति दिनेश पोरवाल ने भी सहकारिता आंदोलन को गति देने के लिए अपने सुझाव दिए।
इस अवसर पर जिले में स्वरोजगार निर्माण के अवसर सुलभ करवाने के लिए विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियों के गठन के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई।
प्रारंभ में सहकारी ध्वज फहराया गया,तत्पश्चात डा. ईश्वर बोराना, लक्ष्मणदास बैरागी, भंवरलाल डोडियार, अर्चना अग्रवाल, प्रथमा कोशिक, उमा भारद्वाज, उषा जैन, सरोज गुप्ता, स्मृति श्रीवास्तव, दीपाली भूचके, राजेश जोशी, हरीश शर्मा, संजय राव, महेन्द्रसिंह चौहान, जमन पाल , मिथिलेश शर्मा, विजय अरोरा, रंजीतसिंह राठौर, चेलुलाल बंजारा, प्रदीप राठौर, सुखचेन, संजय आचार्य सहित कार्यकर्ताओं ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन राजेश पवन शर्मा ने तथा आभार जगदीश हरोरिया ने माना।