

रतलाम । राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर मुरलीवाला फाउंडेशन द्वारा व्याख्यानमाला एवं प्रतिभा सम्मान का आयोजन ग्राम बाजनखेड़ा में किया गया कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदीप जी पांडे, विजेंद्र जी गोठी ,अशोक कुमार जी पाटीदार अतिथि के रूप में उपस्थित रहे
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद जी एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। मुरलीवाला फाउंडेशन के संस्थापक मोहनलाल मुरलीवाला, एवं सचिव विजय पाटीदार द्वारा अथितियो का स्वागत किया गया।
स्वामी विवेकानंद के सपनों का युवा विषय व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता के तौर पर पधारे श्री अशोक पाटीदार ने कहा कि स्वामी जी का नाम आते ही स्वत युवाओं का ध्यान आता है ।स्वामी जी कहते हैं युवावस्था वह अवस्था जब आप अपनी नियति अथवा डेस्टिनी तय करते हैं करियर भविष्य की बात नहीं करते दिस इस टू टाइम डिसाइड यौर डेस्टिनी।
उन्होंने स्वामी जी के जीवन दर्शन और कार्य के पश्चात निहित उनके आदर्श पर विषय रखा। विश्व के चिंतक विचारक प्रोफेसर स्वामी विवेकानंद के बारे में क्या सोचते हैं इस विषय के बारे में पाटीदार ने बताया कि हमारी समस्या यह है कि जब तक कोई सात समंदर पार से आकर स्टांप नहीं लगा दे हम अपने महापुरुषों को नहीं मानते । 11 सितंबर विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने कहा, अमेरिका की बहनों और भाइयों इन 5 शब्दों ने दुनिया के सारे दर्शन, फिलासफी को हिला कर रख दिया जानते है क्यों..!
स्वामी विवेकानंद केवल इंटेलेक्चुअल नहीं है,बहुआयामी व्यक्तित्व है । स्वामी विवेकानंद के सपनों का युवा इस व्याख्यानमाला में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक विजेंद्र गोठी* जी ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को हमें स्वतंत्रता मिली पर हम स्वतंत्रता में छुपा स्व नहीं बचा पाए हमें केवल तंत्र मिला पर अपनी संस्कृति अपना गौरव अपना इतिहास जिसे हम अपना कह सकें ऐसा कुछ दिखा नहीं ।बहुत सारे युवाओं को क्रांतिकारियों के नाम नहीं मालूम ।वीरकुवर सिंह 80 वर्ष की आयु में दोनो हाथो से तलवार चलाते थे ,मदनलाल धींगरा चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह कितने नाम याद है हमको देश की आजादी में अनगिनत क्रांतिकारियों ने इस महायज्ञ में अपनी आहुति दी है ।भगत सिंह ओर चंद्र शेखर दोनो मस्ती में लड़ने लगे पहले मेरा विवाह होगा मस्ती ऐसी
दोनों एक दूसरे को ऐसे गिरा रहे थे जैसे मानो लड़ रहे हो ।
वहा आने वाले सज्जन ने पूछा इस तरह की मस्ती का कारण पूछा तो उन्होंने बताया विवाह का अर्थ पहले मेरा बलिदान होगा । हम प्रथम बलिदान के लिए लड़ रहे हैं भारत के लिए बलिदान सर्वोच्च प्राथमिकता थी यह विषय बच्चो को कोन बताएगा ।
स्वामी विवेकानंद के सपनों का युवा कैसा हो इसकी परिकल्पना बताते हुए गोठी जी ने कहा
आने वाले 25 वर्षों में दुनिया को भारत का सिरमौर बनाना
है तो युवाओं को अपनी भूमिका समझते हुए आगे आना होगा।
आजादी का अमृत महोत्सव मतलब नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री प्रदीप जी पांडे ने अपने उद्बोधन में कहा की अतीत की नींव के बिना सुदृढ़ भविष्य का निर्माण नहीं हो सकता। अतीत से जीवनशक्ति ग्रहण करके ही भविष्य जीवित रहता है। जिस आदर्श को लेकर राष्ट्र अब तक बचा हुआ है, उसी आदर्श की ओर वर्तमान युवा पीढ़ी को परिचालित करना होगा, ताकि वे देश के महान अतीत के साथ सामंजस्य बनाकर लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकें।
कार्यक्रम पश्चात युवा प्रतिभाओ का फाउंडेशन द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुरलीवाला फाउंडेशन से विकास पाटीदार, आनंद पाटीदार,कृष्णा पाटीदार, महेश पाटीदार एवं सैकड़ों युवा उपस्थित रहे। उपरोक्त जानकारी मुरलीवाला फाउंडेशन के अध्यक्ष रवींद्र पाटीदार द्वारा दी गई।