रतलाम। पूर्णिमा की चांदनी में कमरे में कमरे में दीपक की रोशनी से प्रकाश फैला हुआ था, अचानक दीपक बुझ गया लेकिन कमरे में अँधेरा नहीं छाया, क्योकि चन्द्रमा की रौशनी कमरे में और अच्छे से फ़ैल गई ।
परमात्मा की करूणा की रौशनी हमारे मन मंदिर में छाने के लिए तैयार है, लेकिन उसके पहले मन में जो कचरा भरा हुआ है उसे हटाना होगा, मन में परमात्मा को प्रवेश करवाना है तो मन को पहले शुद्ध करना होगा । नेगेटिव माइंड को पाजिटिव और पाजिटिव को क्रिएटिव माइंड बनाना होगा ।
जैन धर्म द्रव्य प्रधान नहीं है भाव प्रधान है, मन को सकारात्मक बनाने के पांच मुख्या मंत्र है जिसमें पहला है Be Happy in all situation, भगवन महावीर ५ माह २५ दिन तक रोज गोचरी के लिए जाते और गोचरी नहीं मिलती तो उसी मस्ती में लौट आते, उनके चेहरे पर कभी शिकन नहीं आई, हमरी दुकान पर ५ दिन ग्राहक नहीं आये तो हम विचलित हो जाते है ।
परिस्थितियों को भगवन महावीर भी नहीं बदल सकते थे, लेकिन वो परिस्थितियों के अनुरूप अपने आप को ढाल लेते थे । ऐसे हम हर परिस्थिति में अपने आपको ढालना सीखे ।
दूसरा सूत्र है Exam will come in every day, राह चलते कोई हमें गाली दे दे तो हम उससे झगडा कर लेते है क्योंकि हमें क्रोध आ जाता है, जब हमें गाली सुनकर क्रोध आ जाता है तो प्रवचन सुनकर क्षमा क्यों नहीं आती है ।
आपके कपड़े सामने वाला जरुर गन्दा कर सकता है लेकिन आपका मन आपके स्वंय के अलावा और कोई गन्दा नहीं कर सकता है ।
तिसरा सूत्र है Accept the changes परिवर्तन को स्वीकार करना सीखो, पानी एक जमा रहता है तो सड़ जाता है और बहता रहता है तो सबकी प्यास बुझाता है, मौसम बदलता है तो ही फसले पकती है ।
सुख है तो दुःख भी होगा दुःख आया है तो सुख भी आयेगा । मन की मानते मानते जीवन गुजर गया, अब महावीर की मान लो जीवन सुधर जायेगा ।
चौथा सूत्र है Never tie the knot of hate बैर की गांठ कभी मत बांधो- चार दिन पेट साफ़ न हो तो कितनी बैचेनी हो जाती है, तो वर्षो के वैर की गांठ मन में बाँध कर बैठे हो तो मन की क्या हालत होती होगी जरा सोचो, इसलिए बैर की गाँठ कभी मत बांधो ।
पांचवा सूत्र है Think before doing करने के पहले सोचो, कोई भी बुरा कार्य करते है तो कोई और टोके या ना टोके लेकिन स्वंय की आत्मा जरुर रोकती है की ये गलत है, उस वक्त अगर रुक गए तो पाप से बच जाओगे, कर्म करना आपके हाथ में है लेकिन उसका फल आपके हाथ में नहीं है ।
ये प्रभावशाली प्रवचन पूज्या महासती धैर्यप्रभा जी महासती जी ने नीमचौक की धर्मसभा में फरमाए, पूज्या महासती स्पष्टवक्ता पूज्य गुरुदेव धर्मं मुनि जी मसा की शिष्या है, आप चार ठाणा नीमचौक स्थानक पर विराजमान है प्रवचन प्रतिदिन प्रात: 09.15 से 10.15 तक चल रहे है । अधिक से अधिक संख्या में प्रवचन का लाभ लेवे।