दीक्षार्थियों पर बरसा सुधा सागर जी वात्सल्य

श्रंमण संस्कृति के महामहिम आचार्य विशुद्ध सागर जी के 5 दीक्षार्थियों को मिला परम पूज्य तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक मुनि सुधा सागर जी का मंगल आशीर्वाद

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में चातुर्मासरत परम पूज्य सुधासागर जी गुरुदेव ने पांचों दीक्षार्थियों भाईयो के सिर पर हाथ रखकर दी धर्म साधना की प्रेरणा। श्रमण संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का एक अद्भुत और भावपूर्ण दृश्य समाज जन को देखने को मिला। भावी मुनिराज दिल्ली में पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज से दीक्षा ग्रहण करने वाले सभी ।श्रंमण पथ के राही दीक्षार्थी भैया जी को जगतपूज्य मुनिपुंगव 108 श्री सुधा सागर जी महाराज का वात्सल्यमयी आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

भाव पुर्ण दृश्य
गुरुदेव एक-एक कर सभी दीक्षार्थियों के सिर पर स्नेह से हाथ फेरते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं। कुछ दीक्षार्थी भावविभोर होकर गुरुदेव के चरणों में झुक जाते हैं। गुरुदेव उन्हें उठाकर पुनः आशीर्वाद देते हैं। पूरे वातावरण में शांति, श्रद्धा और वात्सल्य का भाव व्याप्त था।

दद्दू ने कहा कि परम पुज्य सुधा सागर जी गुरु का वात्सल्य प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुदेव ने दीक्षार्थियों को धर्म, संयम और साधना के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि दीक्षा का मार्ग कठिन है, लेकिन गुरु का आशीर्वाद और आत्मबल से हर बाधा पार की जा सकती है। इस अवसर पर पांचों दीक्षार्थी भाइयों ने गुरुदेव सुधा सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन भी किया। इस अवसर पर अक्षय भैया, डॉ जैनेन्द्र जैन राकेश शाह कमलेश नीना पाहडिया, मुक्ता राजेश जैन दद्दू, अतिशय जैन आदि कंई श्रावक-श्राविकाएं भी उपस्थित थीं। सभी ने इस दुर्लभ क्षण को अपने लिए सो भाग्य शाली माना और नमोस्तु शासन जयवंत हो का गुंजायमान किया ।
जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि यह प्रसंग “गुरु की कृपा” और “शिष्य की समर्पण भावना” का जीता-जागता उदाहरण है। जब गुरु का हाथ सिर पर होता है, तो शिष्य का जीवन धन्य हो जाता है।

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