जो सुख में साथ निभाए वो ही रिश्ते होते है और जो दुःख में साथ निभाए वो फरिश्ते होते है – पूज्या महासती धैर्यप्रभा महासती जी

रतलाम। किसान खेत में बीज डालता है, सड़क पर नही डालता है, उसे पता है की आज खेत में थोड़े बीज डालेगा तो आने वाले समय में बहुत सारी फसल मिलेगी ।
परीक्षा के समय विद्यार्थी न टीवी देखता न मोबाईल चलाता है, क्योंकि उसे परीक्षा परिणाम की चिंता होती है । व्यापारी आज व्यापार में पैसा लगाता है तो आने वाले समय में कमाता है, व्यापारी अपना पैसा जुए में नही उड़ाता है उसे अपने व्यापार को अच्छे से चलाने की चिंता रहती है ।
मतलब सबको अपने आने वाले कल की चिंता होती है। किसान हो या विद्यार्थी या व्यापारी हो सबको अपने आने वाले कल की चिंता होती है, और अपने आने वाले कल को सँवारने के लिये वो अथक प्रयास भी करते है। कहने का मतलब है की किसान हो या विद्यार्थी या व्यापारी या अन्य सभी अपने आने वाले कल के लिये आज मेहनत कर रहे है क्योंकि सबको आने वाले कल की सबको चिंता है लेकिन उसी इंसान ने अपने आने वाले भव के लिये कभी कुछ सोचा है कभी कोई प्रयास किया।
आप भगवान से माँगते भी है तो क्या माँगते है धन, सत्ता, सुंदरता, सम्बंध। भरपूर धन हो लेकिन रेगिस्तान में फँस गए तो वँहा धन संपत्ति मिट्टी और खाना-पानी बहुमूल्य हो जाएगा।
सत्ता पास हो लेकिन खुद का सुरक्षाकर्मी गोली मार दे तो ऐसी सत्ता किस काम की। बहुत सुंदर चेहरा हो और गले में कैंसर की छोटी सी गाँठ हो जाए तो वो सुंदरता किस काम की बचेगी।
सम्बन्ध बना लो माता, पिता, भाई, बहन, पति पत्नि लेकिन अटैक आ जाए तो जाना आपको ही पड़ेगा, कोई ये नही कहेगा की आपकी जगह में चला जाता हूँ। मतलब धन, सत्ता, सुंदरता, सम्बन्ध सब छलावा है क्षणिक है, ये स्थाई सुख नही है
जो सुख में साथ निभाए वो ही रिश्ते होते है और जो दुःख में साथ निभाए वो फरिश्ते होते है । यँहा तो एक सामायिक में भी चित्त नही लगता है। सामायिक के वक्त मन मथुरा और दिल दिल्ली की और भागता है।
ये प्रभावशाली प्रवचन पूज्या महासती धैर्यप्रभा जी महासती जी ने नीमचौक की धर्मसभा में फरमाए, पूज्या महासती स्पष्टवक्ता पूज्य गुरुदेव धर्मं मुनि जी मसा की शिष्या है, आप चार ठाणा नीमचौक स्थानक पर विराजमान है प्रवचन प्रतिदिन प्रात: 09.15 से 10.15 तक चल रहे है । अधिक से अधिक संख्या में प्रवचन का लाभ लेवे।

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