पुण्यतिथि प्रसंग पर गौसेवा कर नांदेचा परिवार ने महापुण्य अर्जित किया

नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप भी हुए

रतलाम। आगम शास्त्र में दान का बड़ा महत्व उल्लेखित हैं। निःस्वार्थ भाव से किया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता हैं और जहां गौवंश को दान करवाया जाए, वहां तो वह महादान हो जाता हैं। ऐसा दान करने से परिवार के अंदर पूर्वजों के परोपकार के संस्कार झलकते हैं। शोक या पुण्यतिथि स्वरूप कार्यक्रम करना मानवीय प्रवृति की एक परंपरा है। मान सम्मान की दृष्टि से उसमें आडंबर करने की विवशता का आवरण भी चढ़ जाता है। किंतु पुण्यतिथि प्रसंग के दौरान यदि दान किया जाए तो वह पुण्य बंध का कारण हो जाता है। यहां समाजसेवी एवं पारणा समिति के संयोजक प्रकाशचन्द्र नांदेचा की धर्म सहायिका धर्मनिष्ठ श्राविका चंद्रकांता नांदेचा की चतुर्थ पुण्य स्मृति प्रसंग पर श्री नांदेचा एवं परिवारजन द्वारा न्यू जैनम ग्रुप के सदस्य दंपत्तियों को साथ लेकर दान स्वरूप विभिन्न कार्य किए गए। इसके अंतर्गत कार्यक्रम के प्रारंभिक दौर में सभी श्रीगोपाल गौशाला में एकत्रित हुए। यहां गौवंश को गौ ग्रास एवं गुड़ का दान कर गौसेवा की गई। स्वल्पाहार के बाद श्रीअन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र लक्कड़पीठा एवं बिरियाखेड़ी स्थित वृद्धाश्रम में सेवा कार्य कर उनके साथ समय बिताया। दोनों स्थानों पर सभी को दैनिक उपयोगी आवश्यक सामग्री का किट भेंट किया गया। इधर अलकापुरी में प्रकाशचंद्र नांदेचा की ओर से नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप का आयोजन किया गया। इसमें अलकापुरी महिला मंडल की सदस्यों ने एक स्वर में सभी मंत्रों के राजा माने जाने वाले नवकार महामंत्र की सामूहिक स्तुति एवं गुरु गुणगान किया। जाप करने की ऐसी मधुर शैली हुई कि उपस्थितजन अभिभूत एवं मंत्रमुग्ध होकर वे भी मधुर सुर में सुर मिलाते हुए गुणगुनाने लगे। गौरतलब है कि जाप करने से सुकून मिलने के साथ एकाग्र चित्त रहने का अभ्यास होता है। जाप के अंतिम चरण में जाप आराधकों को प्रकाशचंद्र नांदेचा परिवार की ओर से प्रभावना वितरित की गई। दिनभर के उक्त कार्यक्रम करके नांदेचा परिवार प्रफुल्लित हो गया। इस अवसर पर प्रकाशचंद्र नांदेचा के साथ किरण जितेंद्र मालू प्रतापगढ़ (राज), रेणु अनूप घोड़ावत झाबुआ, आरती कमलेश पटवा बदनावर, न्यू जैनम ग्रुप के जयंतीलाल जैन, निर्मल गोखरू, संजय सुनीता मोदी दंपत्ति, बाबूलाल धम्माणी, दिलीप नाबेड़ा आदि उपस्थित थे। सभी उपस्थितजन ने उक्त आयोजित कार्यक्रम की सराहना की। समय समय पर इस तरह के निःस्वार्थ रूप से दान कार्य होने से एक दूसरे को प्रेरणा मिलते रहने के साथ पुण्य अर्जित करने का सुलभ मार्ग भी मिलता हैं।

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