बच्चो ने किया धरती के देवों का पूजन – अश्रुओं की धाराओं से आत्मीय अभिषेक

जिला स्तरीय माता पिता पूजन में सैकड़ों हुए शामिल

रतलाम 13 फरवरी 23 । माता पिता पूजन दिवस के पावन प्रसंग पर बच्चों ने धरती के देव अपने माता-पिता को कुमकुम का तिलक लगाकर उन्हें पुष्पों की माला पहना पूजन ,आरती व परिक्रमा कर उनका वंदन किया । अपने बच्चों द्वारा भाव से पूजित होकर बच्चे माता-पिता के गले लगे तो दोनों ओर से अश्रुओं की धारा बह निकली। भाव विव्हल कर देने वाले भारतीय संस्कृति के इस विचक्षण महोत्सव में दस साल से लेकर सत्तर साल तक की संतानों ने अपने माता पिता का पूजन कर यशस्वी भव: का आशीर्वाद लिया। इस मार्मिक प्रसंग को देखकर पूज्य श्री कौशिक जी महाराज की भी आँखे भर आयी।
सम्पूर्ण माह चलेगा उत्सव
श्री योग वेदांत सेवा समिति एवं युवा सेवा संघ रतलाम द्वारा आयोजित मातृ पितृ पूजन दिवस 14 फरवरी के उपलक्ष्य में सैकड़ों माता पिता पूजन कार्यकम में शामिल हुए । मां कालिका माता गरबा ग्राउंड में पुराण मनीषी आचार्य श्री कौशिक जी महाराज के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर प्रहलाद पटेल के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। अतिथियों द्वारा लड्डू गोपाल एवम पूज्य सदगुरुदेव की पादुका पूजन एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। युवा सेवा संघ द्वारा ये आयोजन पूरे फरवरी माह में किया जाएगा।
ऐसा विलक्षण पूजन नहीं देखा – कौशिक जी महाराज
कार्यक्रम बच्चों ने संकल्प लिया कि 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन घर में करेंगे तथा माता पिता और गुरुजनों का आदर, सत्कार एवं आज्ञा पालन कर अपने जीवन को ओजस्वी तेजस्वी बनायेंग। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि अपने जीवन में उन्होंने इतना विलक्षण कार्यक्रम नहीं देखा, ऐसे आयोजन केवल भारतीय संस्कृति में ही संभव है। आपने कहा माता-पिता इस धरती पर उपस्थित साक्षात देवता है हमें भूल कर भी कभी उनका अपमान नहीं करना चाहिए ।आपने उपनिषद का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने जब जीव को मृत्युलोक में भेजना चाहा तो जीव डर गया, जगदीश्वर ने उसे समझाया चिंता मत कर मैं वहां भी मैं तेरे साथ माता पिता के रूप में रहूंगा। किंतु मृत्युलोक में आकर जीव माता पिता रुपी ईश्वर को बिसार देता है। यही से उसका पतन शुरू हो जाता है। धरती के देव माता पिता का सदैव सम्मान और आदर करना ही संतानों का प्रथम कर्तव्य है। आपने युवा सेवा संघ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा बच्चों में संस्कारों के अभाव के कारण संस्कृति पर खतरा है और मातृ पितृ पूजन का यह कार्यक्रम निश्चित ही संस्कृति को सहेजने में अतुलनीय है।
संस्कारों को सहेजने में मील का पत्थर
विशिष्ट अतिथि महापौर श्री पटेल ने कहा कि मातृ पितृ पूजन का यह कार्यक्रम आज के बच्चों के लिए महापुरुषों का करुणामयी प्रसाद है और ऐसे कार्यक्रम संस्कारों को सहेजने में मील का पत्थर साबित होंगे। महापौर ने यह कैसा है जादू समझ में ना आया.. भजन गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। आपने रतलाम को सुंदर और स्वच्छ बनाने में सहयोग की अपील की । इस अवसर पर रतलाम में भी महाकाल लोक की तर्ज पर कुछ स्थान विकसित करने की बात कही।
बालिकाओं द्वारा लघु नाटिका प्रस्तुत
कार्यक्रम में पंडित महेश।नंद जी शास्त्री, प्रदेश अध्यक्ष गो एवं गौशाला उत्थान समिति ,पंडित चेतन शर्मा अध्यक्ष वेदिक जागृति पीठ ,पं. संजय मिश्रा,अखंड आश्रम तथा पं. हरीश चतुर्वेदी भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत युवा सेवा संघ संजय दवे,मुकेश मालवीय ,रविंद्र परमार, राजेंद्र निगम , शिव कुमार श्रीवास्तव ,राहुल शर्मा ,प्रतीक भाई, रवि प्रजापति, शंकरलाल राठौड़ ,पंकज ओसवाल, प्रकाश पालीवाल ,जितेंद्र पुरोहित, राकेश परिहार ,लोकेश परिहार ,राधेश्याम शर्मा, पुरुराज सिंह जादौन, लक्ष्मी नारायण गहलोत, महावीरभाई ,नरेंद्र शर्मा तथा श्यामा राठौड़ आदि ने स्वागत किया। बालिकाओं ने मातृ पितृ पूजन की महिमा दर्शाती हुई लघु नाटिका प्रस्तुत की। संचालन रविन्द्र सिंह जादौन ने किया।

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