माता पिता बच्चों पर अनावश्यक दबाव ना बनाएं

प्रो.डी.के.शर्मा
47,देवप्रभा, राजपूत बोर्डिंग कॉलोनी, रतलाम(म.प्र.)
सम्पर्क-7999499980

गत दो माह में कोटा में नीट की कोचिंग ले रहे विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें आई। एक ऐसी हृदय विदारक खबर आज ही आई। आत्म हत्या के पूर्व माता पिता को पत्र में उसने लिखा कि वह उनकी इच्छा को पूरी करने में असमर्थ है, इसलिए आत्महत्या कर रहा है। प्रतिवर्ष देश में कई बच्चें आत्महत्या करते हैं। इनमें लड़कियंा भी होती है। अधिकतर ऐसी दुःखद घटना को, एक घटना मान कर सब भूल जाते हैं। यह बहुत अनुचित है। ऐसी घटनाओं पर सरकार, शिक्षाविद और सबसे अधिक माता पिता को विचार करना चाहिए। कोचिंग संस्था चलाने वालो को भी विचार कर पढ़ाने की ऐसी पद्धति विकसित करनी चाहिए जो विद्यार्थी को अनावश्यक दबाव में ना लाए। फिर भी सबसे अधिक जिम्मेदारी माता पिता की ही है। माता पिता को बच्चों की क्षमता और रूचि का सही आकंलन कर उनके लिए सही विषय तय करने चाहिए। जब भी बच्चे पर मां बाप अपनी इच्छाएं थोपतें है तो यही परिणाम होता है। आज कल डॉक्टरी और इंजीनियरिंग के अतिरिक्त भी कई विषय उपलब्ध हैं जिनमें अच्छा केरियर बन जाता है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि धन कमाना ही जीवन का एक मात्र उद्देश्य नहीं हैं। धन केवल माध्यम है। धन से वस्तुएं खरीदी जा सकती है, सुख शांती नही। धन के पीछे भागने की जो प्रवृŸिा समाज में विकसित हो गई है उसके दुष्परिणाम आत्म हत्याओं और टुटते रिश्तो में देखे जा सकते है। कोचिंग सस्थाएं बहुत बेलगाम हो गई है। वे धन कमाने के लिए अधिक से अधिक बच्चे भर्ती कर बहुत अनावश्यक दबाव बनाते हैं। हमारी जानकारी के अनुसार वे श्रेष्ठ बच्चों का एक अलग वर्ग बना कर उन पर बहुत दबाव बनाते है। अन्य पर वे विशेष ध्यान नहीं देते। इससे बच्चे हताश हो जाते है और आत्म हत्या कर लेते है। यहां तक सुनने में आया है कि कुछ बच्चों को मादक द्रव्य देकर उन्हें अधिक पढ़ाया जाता है ताकि वे अधिक नम्बर लाकर संस्था का नाम रोशन कर सके। सभी कोंचिग सस्थाओं पर कठोर नियंत्रण करना चाहिए। कई सस्थाएं मिडिल क्लास से ही बच्चों को अपने यहां भर्ती कर लेते हैं। यह सब रोका जाना चाहिए। वास्तव में सबसे बड़ा उत्तरदायित्व माता पिता का है। वे अपने सपने बच्चो पर ना थोपें। बच्चों पर निर्णय थोपने से ही वे हताश निराश हो जाते है और आत्म हत्या कर लेते हैं। सभी धर्मो में कहा गया है कि प्रत्येक बालक अपना भाग्य लेकर पैदा होता है। अतः भाग्य और ईश्वर पर विश्वास करें और अपने बच्चो को सुरक्षित रखें।

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