भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में जैन समाज का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं?

सुभाष जैन काला प्रदेश अध्यक्ष जैन राजनैतिक चेतना मंच मध्यप्रदेश

इंदौर । देशहित में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले जैन समाज की राजनीतिक भागीदारी पर गंभीर सवाल भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में जैन समाज को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना देशभर के जैन समाज के लिए निराशाजनक एवं विचारणीय विषय है। राजनीति चेतना मंच के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन समाज संख्या की दृष्टि से भले ही छोटा हो, लेकिन देश के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं सेवा क्षेत्र में उसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक है। देश के कर राजस्व में योगदान देने वाले व्यापार एवं उद्योग जगत में जैन समाज की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। इसके साथ ही समाज द्वारा बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थाएं, चिकित्सालय, गौशालाएं, जीवदया केंद्र तथा विभिन्न सामाजिक एवं जनकल्याणकारी संस्थाएं संचालित की जा रही हैं।
अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और जीवदया जैसे सिद्धांतों पर चलने वाला जैन समाज सदैव राष्ट्रहित एवं समाजसेवा में आगे रहा है। देश के विकास में आर्थिक योगदान के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा, जीवदया, पर्यावरण संरक्षण और मानव सेवा के क्षेत्र में जैन समाज की भूमिका उल्लेखनीय है।

ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि इतने महत्वपूर्ण सामाजिक एवं राष्ट्रीय योगदान के बावजूद भाजपा की राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में जैन समाज को उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला?
यह प्रश्न केवल नई राष्ट्रीय टीम तक सीमित नहीं है। जैन समाज लंबे समय से यह अनुभव करता रहा है कि राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन में, विभिन्न आयोगों एवं महत्वपूर्ण संस्थाओं में तथा संसद और विधानसभाओं में उसकी जनसंख्या, योग्यता, सामाजिक योगदान और राजनीतिक सहभागिता के अनुरूप प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम रहा है।
विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी के संदर्भ में यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जैन समाज का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से भाजपा की विचारधारा से जुड़ा रहा है तथा चुनावों में भी पार्टी को अपना महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन देता रहा है।
समाज की अपेक्षा किसी प्रकार की राजनीतिक कृपा या विशेषाधिकार की नहीं है। अपेक्षा केवल इतनी है कि योग्य, सक्रिय और समाजहित में कार्य करने वाले जैन समाज के प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय संगठन, नीति-निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी योग्यता एवं योगदान के अनुरूप उचित अवसर प्रदान किया जाए।
लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व केवल संख्या का विषय नहीं है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति विभिन्न समाजों और वर्गों की सार्थक भागीदारी में निहित है। यदि किसी समाज का आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्र निर्माण में योगदान महत्वपूर्ण है, तो उसकी आवाज भी राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी रूप से सुनी जानी चाहिए।
यह लेख किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दल के विरुद्ध आरोप नहीं है। यह जैन समाज की लोकतांत्रिक अपेक्षाओं और भावनाओं को राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का एक सकारात्मक प्रयास है।
अब समय आ गया है कि जैन समाज भी अपनी राजनीतिक चेतना को मजबूत करे, योग्य एवं सक्रिय युवाओं और समाजसेवियों को राजनीति में आगे बढ़ाए तथा सभी राजनीतिक दलों के समक्ष अपनी सम्मानजनक एवं न्यायसंगत राजनीतिक भागीदारी का विषय मजबूती से रखे।

जैन समाज की मांग स्पष्ट है—
हमें केवल मतदाता के रूप में नहीं,
निर्णय प्रक्रिया में भागीदार के रूप में भी देखा जाए।
हमें कृपा नहीं, समान अवसर चाहिए।
हमें उपेक्षा नहीं, सम्मानजनक प्रतिनिधित्व चाहिए।

राष्ट्रीय राजनीति में जैन समाज की आवाज जितनी मजबूत होगी, लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाज की भागीदारी उतनी ही प्रभावी होगी।

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