रतलाम की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आई इंटेक

रतलाम 18 अगस्त।  जिले में बिखरी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, संधारण और उनके प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास इंटेक (INTACH) की स्थानीय शाखा के गठन की पहल शुरू की गई है। इंटेक देशभर में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा उनके प्रति जागरूकता के लिए कार्यरत संस्था है। रतलाम जिले में भी अनेक ऐतिहासिक इमारतें, राजमहल एवं किले, मंदिर, बावडिया, कलात्मक भवन, भित्ति चित्र, चित्रकारी, कलाकृतियां, पांडुलिपियां, ऐतिहासिक अभिलेख, दुर्लभ वस्तुओं के संग्रह तथा अन्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें मौजूद हैं, जिनके संरक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
इसी उद्देश्य को लेकर गत दिवस जिले के सामाजिक एवं धरोहर संरक्षण में रुचि रखने वाले नागरिकों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में इंटैक के पुराने सदस्य अनिल झालानी, जावरा नवाब परिवार के सदस्य हशमत अली खान तथा देशभर में अनेक मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों से जुडे रतलाम निवासी इंटेक सदस्य  विजय सोनी ने स्थानीय चैप्टर के गठन की प्रक्रिया को आगे बढाने की पहल की।
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता राजेश घोटीकर, डॉ. श्वेता विंचुरकर, नवोदित वैरागी, नरेंद्र श्रेष्ठ, डॉ. ईश्वर बोराणा, अर्जुन पालीवाल, मुकेश शुक्ला, शुभम सिखवाल, महेंद्र भरकुंदीया, जुबेर आलम कुरैशी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे। उपस्थित सदस्यों ने रतलाम की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

राजमहल की दुर्दशा पर विशेष चर्चा
अनिल झालानी ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में रतलाम राजमहल की वर्तमान स्थिति और उसके संरक्षण को लेकर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही जिले की अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों का क्रमबद्ध रूप से भ्रमण कर उनकी स्थिति का अध्ययन करने, संरक्षण की आवश्यकता वाली धरोहरों को चिन्हित करने तथा उनके संरक्षण के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाने पर सहमति बनी।
प्रस्तावित स्थानीय चैप्टर के माध्यम से जिला प्रशासन, पुरातत्व विभाग, तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से जिले की धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें पर्यटन के मानचित्र पर लाने के प्रयास किए जाएंगे।

युवाओं और विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा
बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि कॉलेज विद्यार्थियों, युवाओं तथा सामाजिक संस्थाओं से जुडे ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाए, जिनकी इतिहास, कला, संस्कृति एवं धरोहर संरक्षण में रुचि है। उन्हें इंटेक से जोड़कर इस अभियान में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानीय चैप्टर के गठन के साथ ही प्रथम चरण में रतलाम जिले की महत्वपूर्ण धरोहरों की सूची तैयार कर उनका प्राथमिक सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण किया जाएगा। जिसमे जन भागिता अपेक्षित है एवं आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए शीघ्र ही पुन: बैठक आयोजित की जाएगी तथा जिले की धरोहरों के संरक्षण की दिशा में व्यवस्थित रूप से कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

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