उदयपुर के श्रावकों ने लिया शामलाजी तक विहार सेवा का लाभ

उदयपुर (निलेश कांठेड़)। मेरठ से पूना के लिए विहार यात्रा पर निकले श्रमणसंघीय सलाहकार भीष्म पितामह सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा ने मंगलवार 14 मार्च को राजस्थान से विदाई लेकर गुजरात की सीमा में प्रवेश किया। मुनिवृन्द बिछीवाड़ा से क्षेत्र से विहार करते हुए रतनगढ़ बॉर्डर से राजस्थान सीमा छोड़ते हुए गुजरात में प्रवेश करते हुए शामलाजी पहुंचे। विहार यात्रा में पूज्य समकितमुनिजी म.सा., भवान्तमुनिजी म.सा. एवं जयवंतमुनिजी म.सा. के साथ उदयपुर के श्रावकगण भी थे। गत 9 मार्च को उदयपुर होली चातुर्मास पूर्ण कर विहार करने के बाद से ही उदयपुर के श्रावकगण निरन्तर विहार सेवा का लाभ ले रहे थे। करीब 150 किलोमीटर तक की विहार सेवा का लाभ उदयपुर श्रावक संघ ने प्राप्त किया। विहार यात्रा में मंगलवार को उदयपुर के सुश्रावक फतेहलाल सियाल, नारायण वीरवाल, जीवनसिंह सराफ, अनिल जारोली,नानालाल कोठारी, चन्द्रप्रकाश पोखरना, महेन्द्र पोखरना, पीसी कोठारी, पवन मेहता, पारस छाजेड़ आदि शामिल रहे। पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने उदयपुर में होली चातुर्मास के दौरान एवं बाद में शामलाजी तक विहार यात्रा के दौरान दी गई सेवाओं के लिए उदयपुर के श्रावक-श्राविकाओं की अनुमोदना करते हुए कहा कि जिनशासन के प्रति उनकी भक्ति अनुकरणीय है। उन्होंने पूरे उदयपुर श्रावक संघ के प्रति हार्दिक मंगलकामनाएं व्यक्त की। उदयपुर से विहार यात्रा में जुड़े श्रावकों ने पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा से पुनः शीघ्र उदयपुर पर्दापण की भावभरी विनती की। विहार यात्रा के तहत पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के गुरूवार तक मोड़ासा पहुंचने की भावना है। इसके बाद वह बड़ोदा क्षेत्र से होते हुए सूरत पहुंचेंगे। सूरत में विराज रहे श्रमणसंघीय आचार्य सम्राट श्रीशिवमुनिजी म.सा. के दर्शन की भावना है। उनके सानिध्य में महाराष्ट्र के नासिक में 23 अप्रेल को अक्षय तृतीया पर वर्षीतप पारणा महोत्सव होंगा। उनका वर्ष 2023 का चातुर्मास पूना के आदिनाथ जैन स्थानक भवन के लिए घोषित है।