तप त्याग व गुणगान के साथ मनाया गया अहिंसा की देवी साध्वी यशकंवर जी म.सा. का 105 वी जन्म जयंती समारोह

पाली (सुनिल चपलोत) । अहिंसा कि देवी थी संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने रविवार को आचार्य रूघुनाथ स्मृति भवन रूई कटला मे राजस्थान प्रवर्तनी यशकंवर जी म.सा. के 105 वें जन्मजयंती सभा मे गुणगान समारोह मे उपस्थित श्रध्दालुओं को सम्बोधित करतें हुये कहा कि जीवो कि रक्षा के लिये यशकंवर जी म.सा ने धर्म के नाम लाखो र्निदोष पशुओ की बलि दि जाने वाली बलि प्रथा को मेवाड़ जोगणिया माता मे बंद करवा के अहिंसा के संदेश को जन – जन तक पहुचाया यशकंवर जी अहिंसा कि देवी थी। उपप्रवर्तिनी मैनाकंवर ने गुरूणीमय्या के गुणगान करते हुये कहा कि वैष्णव कुल में जन्म लेकर संयम अंगीकार करके भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत अहिंसा व्रत का पालन करते हुये जैन धर्म की अलख जगाई। यश गुरूणी के मंगल पाठ सुनकर अनेको दीन दुखियों के बिगड़े काम बन जाया करते थे। साध्वी पुष्पलता, विदुषी ज्योतीप्रभा, मुदिता श्री ने कहा कि यश गुरूणी यथा नाम तथा गुण कि भंडार थी । श्री संघ मंत्री पदमचन्द ललवानी ने बताया कि जन्मजयंती के उपलक्ष्य मे तीन तीन सामायिक के साथ बारह घंटों के नवकार महामंत्र भाग लेने वालो को धनराज धारोलिया,मनमोहन गांधी,देवीचन्द भंसाली तथा लसोड़ परिवार की और से सभी को प्रभावना दि गई। जन्मोत्सव कार्यक्रम मे जौधपुर बिलाड़ा,भीलवाड़ा,चितौड़गढ़ आदि क्षैत्रो के श्रध्दालुओं की उपस्थिति रही। सम्पतराज तातेड़ बताया कि इसदौरान प्रवर्तक सुकन मुनि,युवा प्रणेता महेश मुनि,बालयोगी अखिलेश मुनि तथा श्री संघ के पदमचन्द ललवानी महेन्द्र जैन,शरबत पंगारिया,केवलचंद धोका,प्रकाशचन्द कटारिया, हुक्मीचंद संचेती,सज्जनराज गुलेच्छा, युवामण्डल के मनोज नाबरिया मुकेश मोदी सुनीता पंगारिया अजु पंच की उपस्थिती मे धनपतराज चोपड़ा
ने भक्ति सरिता पुस्तक का विमोचन किया गया। तथा जन्मजयंती पर गोशाला मे चारा डलवाया गया।

Play sound