परस्पर वार्ता आचार- विचार के आदान-प्रदान से ही आपस में ही भ्रांति दूर होती हैं – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

बोलिया । आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सभी ज्वलंत समस्याओं का समाधान हथियारों से नहीं विचारों से संभव है। परस्पर वार्ता आचार- विचार का आदान-प्रदान से ही आपस में ही भ्रांति दूर होती हैं । भ्रांतियों का इलाज न तो डॉक्टर के पास है ना कोई दवाई है, सरकार और विज्ञान भी भ्रांति से मुक्ति नहीं दिला सकती। समय पर भ्रांति का निराकरण नहीं हुआ तो आगे घातक हो सकता है। हटा ग्रह पूर्वा ग्रह को छोड़कर समझा लो या समझ लो कि नीति अपनानी होगी। इससे मध्यस्थता के लिए संत की शक्ति से बड़ी शक्ति नहीं हो सकती हैं । दुर्भाग्य ही है की धर्म समस्या बन गया है इसलिए धर्म गुरुओं को सद्भाव के लिए संतो को मंदिर- मस्जिद से बाहर आकर हिंसा, आतंकवाद, दुराचार, मिलावट, शिक्षा, चिकित्सा, बेरोजगारी आदि समस्याओं को बतलाकर मुक्त मानव समाज का निर्माण करना है।
नगर में 2 दिन प्रवास पर आये राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने उक्त बात जेन स्थानक पर कहीं।
जैन दिवाकर श्री चौथमल मसा की दीक्षा स्थली बोलिया नगर में जैन धर्म के स्थान परंपरा के राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश 80 हजार किलोमीटर पदयात्रा कर बोलिया नगर पहुंचे। मूर्ति पूजक परंपरा के उदयरत्न सागर मसा, लग्घी सागर मसा ने संत मुनि कमल का अभिनंदन किया। दोनों ने मिलकर 25 अप्रैल मंगलवार को आचार्य श्री वीररत्न सुरिशवर एवं पदम भूषण सुरिश्वर, सौम्या श्रीजी सहित 34 जैन साधु- संत के सानिध्य में जैन समाज का मिनी कुंभ सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन को मूर्तरूप देने के लिए सुंदरलाल संघवी, दिनेश राठौर, राजकुमार टड्डा, मोहनलाल नागोता, पुखराज कुंडल, प्रकाश भंडारी आदि ने आयम्बिल भवन में जैन एकता सम्मेलन का आयोजन किया।