श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में प्रवचन

पाव की मोच और छोटी सोच आगे नहीं बढने देती -अभिग्रहधारी राजेशमुनिजी

रतलाम,24 अप्रैल। गणेशजी और सरस्वती बैठे है और लक्ष्मीजी खडे है। इसका अर्थ बुद्धि के रूप गणेशजी और ज्ञान की देवी सरस्वती बैठने के लिए आते है, जबकि धन की देवी लक्ष्मी जाने के लिए आई है। संसार में जो धन की परवाह करता है, वह जीवन हार जाता है, लेकिन जो बुद्धि और ज्ञान की परवाह करता है, धन उसके पीछे खुद-ब-खुद चला आता है। पाव की मोच और छोटी सोच आगे नहीं बढने देती, इसलिए सोच हमेशा उंची रखनी चाहिए।
ये बात उग्रविहारी एवं अभिग्रहधारी श्री राजेशमुनिजी मसा ने कही। नोलाईपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा की निश्रा में आयोजित प्रवचन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो बच्चे अच्छे पढते-लिखते है, उन्हें अच्छे पैकेज मिलते है। इसका मतलब साफ है कि जो ज्ञान और बुद्धि को महत्व देता है, लक्ष्मी को उसके पास आना ही पडता है। इस दुनिया में सारी चीजे चोरी हो सकती है, लेकिन हमारे पुण्य और बुद्धि कभी चुराए नहीं जा सकते। इसलिए बढी सोच से आगे बढना चाहिए। इससे फल सदैव अच्छा मिलेगा।
मुनिश्री ने कहा कि राग-द्वेष से मुक्ति भी ज्ञान ही दिलाता है। ज्ञान नहीं होगा, तो मनुष्य जीवन में इधर-उधर भटकता ही रहेगा। संसार में आशीर्वाद और श्राप नाम की कोई चीज नहीं होती, ये तो सभी कर्मों के फल है। उन्होंने कहा कि सबको अपना आत्मबल जगाने की आवश्यकता है,क्योंकि इसके सहारे ही व्यक्ति आगे बढ सकता है।
महासती श्री कल्पनाश्रीजी मसा ने कहा कि मोक्ष प्राप्ति के लिए सम्यक ज्ञान, दर्शन और चारित्र होना आवश्यक है। तपस्वी आत्माएं तप-आराधना कर इसी मार्ग पर आगे बढ रही है। इस दौरान श्री दर्शनमुनिजी मसा, श्री अभिनंदन मुनि जी मसा, श्री राजेन्द्रमुनिजी मसा एवं महासती श्री रमणीक कुँवर जी मसा, श्री चंदना जी मसा, श्री लाभोदया जी मसा, श्री जिज्ञासा जी मसा श्री चंदनबाला जी मसा आदि ठाणा उपस्थित रहे। संचालन रखब चत्तर ने किया। अंत में प्रभावना का वितरण मधुबाला-दिलीपकुमार गंग परिवार द्वारा किया गया।