लेखक – प्रो.डी.के.शर्मा
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आलेख
पाक जल रहा है। खून खराबे और घृणा पर जन्मा पाक आज तक खून खराबे, हत्याओं और आंतकवाद से मुक्ति नही पा सका। इमरान खान के प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से ही खबरें चल रही थी कि वे गिरफ्तार किये जाएंगे। अंततः हो ही गए। जिस बेरहमी से उन्हें गिरफ्तार किया गया वह बहुत अमानवीय है। सेना के रेन्जर्स बड़ी संख्या में उन्हें पकड़ने पहुंचे और कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए ले गए। कुछ दिन पूर्व तक ये रेन्जर्स उनको सलाम मारते थे। यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें हाई कोर्ट से घसीटकर ले जाया गया। स्पष्ट है कि न्याय पालिका का कोई सम्मान पाकिस्तान में नहीं है।
इमरान सेना के सहारे ही प्रधानमंत्री बने थे। सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में कोई भी प्रधानमंत्री सेना के सहयोग के बिना काम नही कर सकता। अपने जन्म के बाद पाकिस्तान ने भी प्रजातंत्र प्रणाली ही अपनाई, किन्तु सफल नही हो पाई। सेना ने उसका शिकजंा पूरे पाकिस्तान पर जमा लिया। वहंा की सेना विशुद्ध रूप से सेना नही है। वह देश को लुटने वाली एक संस्था है। वह सभी प्रकार के उद्योग धंधे चलाती है। कुछ समय पूर्व सेवा निवृत्त हुए जनरल बाजवा ने 12 अरब डॉलर की सम्पत्ति जमा की है, ऐसा अनुमान है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ समय तक इमरान के रिश्ते सेना से ठीकठाक चले। इमरान अपने तरीके से चलना पसंद करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान को क्रिकेट वल्र्डकप जिताया था इसलिए वे लोक प्रिय हैं। उनके ‘ाासन काल में बढ़ती महंगाई के कारण वे अलोकप्रिय होने लगे थे लेकिन उनके हटाए जाने से लोग सब शिकायतें भूल गए। उनके बाद बने प्रधानमंत्री ‘ाहबाज ‘ारीफ बहुत ही निक्कमें निकले। पाकिस्तान दिवालिया हो गया और इमरान फिर से लोकप्रिय।
जब इमरान और सेना में खटपट होने लगी तब वहंा के न्यायालय इमरान के पक्ष में खड़े रहे, लेकिन बहुत समय तक सेना की नाराजगी मोल लेना पाकिस्तान में सम्भव नही है। इसलिए इमरान की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहरा दिया। इमरान की गिरफ्तारी का तरीका भी अवैधानिक है। गिरफ्तार करने का अधिकार पुलिस को होता है। सेना केवल मार्शल लॉ लगने के बाद ही गिरफ्तार कर सकती है। उन्हें उच्च न्यायालय से उठा लिया गया फिर भी न्यायालय उसे अवैधानिक नही कह सके। पाकिस्तान में सेना का विरोध सम्भव ही नही है।
पाकिस्तान का इतिहास खून खराबे का ही है। वहा प्रधानमंत्री बनने का अंतिम परिणाम जेल जाना अथवा मौत पाना ही है। इतिहास दोहराएं तो पता चलेगा। सबसे पहले प्रधान मंत्री सुहरावर्दी को जेल में डाला गया। उन्हें अय्यूब खान द्वारा तखता पलट का समर्थन नही करने के कारण जेल भेजा गया। जुल्फीकार अली भुट्टो को,उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश का आरोप लगा कर, 4अप्रेल 1979 को फांसी दे दी गई। उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो को भी जेल जाना पड़ा। मुशर्रफ के राज में उनकी हत्या कर दी गई।
2008 में युसूफ रजा गिलानी को फर्जी कम्पनियों के नाम पर धन के लेन देन का आरोप लगा कर जेल में डाला गया। नवाज ‘ारीफ दो बार जेल गए। 2019 में उन्हें इलाज के लिए इग्लैण्ड जाने की अनुमति दी गई। अभी उनके छोटे भाई ‘ाहबाज ‘ारीफ प्रधानमंत्री हैं। वे भी जेल में 7 महीने मनीलॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल में रह चुके हंै। उन्हें इमरान ने जेल में डाला था, अब बारी इमरान की आई। इमरान पर 140 से अधिक मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। यह सेना का विरोध करने का ही परिणाम है।
उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री बनने के दो ही परिणाम होते हंै- जेल और मौत। वहां की न्यायापालिका भी असहाय है, अतः अब इमरान का जेल से जीवित बाहर आना सम्भव नही लगता। परन्तु इमरान के पक्ष में उमड़ा जन समर्थन महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान में पहली बार वहां के नागरिक सेना के विरूद्ध इस तरह खड़े हुए हैं।
पाकिस्तान की घटनाओं पर नजर रखना भारत के लिए बहुत आवश्यक है। पाकिस्तान हमारा दुश्मन पड़ोसी देश है इसलिए वहां की अस्थिरता हमारे लिए चिन्ता का विषय है।