7 दिवसीय प्रभु प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु गुरु भगवंतो का हुआ भव्य मंगल प्रवेश

आकुर्डी (पुना) । परोपकार सम्राट गच्छाधिपति जैनाचार्य श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के आज्ञानुवर्ति शिष्य वरिष्ठ मुनिराज श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा. मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.मुनिश्री प्रीतियश विजयजी म.सा.का श्री शांतिनाथ दादा सह तीन प्रभु प्रतिमा एवं दादा गुरुदेव श्री राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के सप्त दिवसीय भव्यतम प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु गुरु भगवंतो का मंगल प्रवेश गुरुभक्त श्री भंवरलालजी सुराणा के गृह निवास पर सामैया प्रारंभ हुआ महिलाएं सिर पर चांदी के कलश लिए अगवानी कर रही थी। रंगोली एवं अक्षत से आंगन सजा हुआ था। पुरुष श्वेत वस्त्र एवं महिलाएं केसरिया वस्त्रों में चल रही थी। विशेष ड्रेस कोड में युवा मंडल एवं युवति मंडल चल रहे थे। वाजते गाजते धूमधाम से मंगल प्रवेश किया गया। निगडी से आकुर्डी के मुख्य मार्गो से होता हुआ वरघोड़ा जिन मंदिर पहुंचा। देव-गुरु दर्शन वंदन के पश्चात समीप के ही उपाश्रय आराधना भवन में धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। सकल श्रीसंघ ने गुरु वंदन किया पश्चात मुनिराज श्री पीयूष विजयजी म.साहेब ने मंगलाचरण कर प्रभु व गुरु का ध्यान स्मरण कराया। मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.साहेब ने मंगल प्रवेश के प्रसंग पर कहा जिनेश्वर के समीप आना ही जिनेंद्र भक्ति महोत्सव का सार है। प्रभु का दर्शन संसार में सर्वोत्कृष्ट फल प्रदाता है। लक्ष्मी का दर्शन एवं बंगले मकान जमीन आदि के दर्शन प्रायः पाप कारक हैं,किंतु प्रभु का दर्शन तो पुण्य कारक ही हैं। 7 दिन के प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रभु के साथ गुरु के साथ धर्म आराधना के साथ रहना है। प्रत्येक धर्म अनुष्ठान में समय-समय पर आना है। समय अच्छा है तो अच्छे कार्य करें। श्री पीयूषचंद्र विजयजी म.सा.ने प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजन की जानकारियां प्रदान की एवं प्रमाद को त्यागकर जागृत होने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम पश्चात जयंतीभाई राठौड़ की ओर से सकल श्रीसंघ की नवकारसी का आयोजन किया गया। संघ के अग्रणी जयंतीभाई रणजीत भाई रमेश भाई राजू भाई ने सभी को समय पर सभी कार्यक्रम में पधारने का नम्र निवेदन किया। मूलनायक श्री संभवनाथ दादा के मंदिर एवं उपाश्रय भवन की एवं नगर के गलियों को आकर्षक रूप में सजाया गया। 17 मई को प्रभु उत्थापन कुंभ व दीप स्थापन एवं ज्वारारोपण
के अनुष्ठान होंगे। प्रतिदिन प्रवचन प्रारंभ है।