
रतलाम। श्रीसाधु मार्गीय जैन संघ के वरिष्ठ रहे स्वर्गीय मांगीलाल मांडोत की धर्म सहायिका कलावती बेन मांडोत का 83 वर्ष की उम्र में अरिहंत शरण (निधन) हो गया। वे प्रकाश, विकास मांडोत, संगीता बंबोरी, स्नेहलता डोशी, अंजू चौधरी की माताजी एवं पारस बंबोरी, रमेश डोशी, सुशील चौधरी की सासुजी व निखार, लक्ष्य, चिराग, कृति की दादीजी थे। उन्होंने अपने जीवन में दया (छः काया) का मासक्षमण के साथ छोटी बड़ी कई तपाराधनाएं की हैं। अर्थात उन्होंने अपने जीवन को पूर्ण रूप से धर्ममय, तपमय के साथ प्रतिदिन धर्म आराधना करना नियमित जीवन शैली का हिस्सा बना लिया था। वे मृदुभाषी, सरल स्वभावी एवं मिलनसार व्यक्तित्व की धनी थी। व्यसन मुक्ति प्रणेता आचार्यश्री रामलालजी “रामेश” की अनन्य भक्त थी। समय समय पर आचार्य भगवंत के वर्षावास में एवं आचार्यश्रीजी के सानिध्य में प्रतिवर्ष पर्युषण पर्व पर विशेष आराधना का लाभ लेते थे। संघ, समाज, महिला मंडल के अलावा धार्मिक, सामाजिक कार्यो में सदैव सक्रियता रखने वाली श्रीमती मांडोत संयमी आत्माओं की वैयावच्च में सदैव अग्रणी रहते थे। श्रीसाधु मार्गीय जैन संघ सहित जैन समाज, विभिन्न धार्मिक, सामाजिक आदि संस्थाओं के पदाधिकारियों, सदस्यों ने श्रीमती मांडोत की समाज, नगर में एक चितपरिचित, धार्मिक व्यक्तित्व की अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए परिवारजन को इस दुःख की घड़ी में ढांढस बंधाया।