अपने गुरुदेव को आदर्श मान कर दृढ़ संयम का पालन किया, स्वाध्याय प्रेमी व सरल स्वभावी थे, उप प्रवर्तक श्री प्रेम चंद जी महाराज
प्रस्तुति: विजय कुमार लोढा निम्बाहेड़ा( बेंगलुरु)
(आठवी पुण्य तिथी पर विशेष)

आपका जन्म गांव कसुर ( पंजाब) में संवत 1991 की कार्तिक शुक्ला दशमी को माता आत्मा देवी की कुक्षी से हुआ! आपके पिता का नाम चानन मल जी था ! आप पांच भाइयो में सबसे छोटे थे! आपके सबसे बड़े भ्राता , जैन दिवाकर परम्परा के महान सन्त जिनको चोथे आरे की बानगी कहा गया है , घोर तपस्वी श्री रोशन लाल जी महाराज थे, जब तपस्वी श्री रोशन लाल जी महाराज ने संयम अंगीकार किया आप केवल डेढ़ वर्ष के थे! आपका पुरा परिवार धर्म पर पूर्ण आस्थावान था, आपकी माता श्री बहुत ही धर्मशीला नारी थी! वह आपको हर समय णमोक्कार महामंत्र व धार्मिक स्तवन सुनाया करती थी! जब आप थोड़े बडे होने लगे आपको बताया कि तुम्हारे एक बड़े भाइ है , जिन्होंने दीक्षा ली है तभी से आपके हृदय में यह भावना जागृत हुई कि में उनके दर्शन करूगां! आपकी प्रारम्भिक शिक्षा कसूर में ही हुई, पर देश की विभाजन की विभशिका के चलते आपका परिवार जगधारी शिफ्ट होगया! आपने आगे का अध्ययन वही पर किया ! आपके मन में यह जम गई कि मेरे अग्रज भ्राता मुनि है तो मुजे उनके दर्शन करने हे! उस समय संचार व आवागमन के साधन इतने नही थे! दो वर्ष बाद मालूम पड़ा कि भ्राता श्री ब्यावर में विराजमान हे आपने उनके दर्शन सन 1952 में किये! 1954 में तपस्वी श्री रोशन लाल जी म.सा का चातुर्मास अम्बाला में था! आपको वेराग्य का उत्कृष्ठ रंग चढ़ा व बहुत ज्ञानार्जन किया ! तपस्वी श्री का सन 1955 का चातुर्मास बिकानेर में उपाचार्य श्री गणेश लाल जी म.सा के सानिध्य में था , उस वर्षावास में कार्तिक शुक्ला सप्तमी को उपाचार्य श्री के सानिध्य में आपकी दीक्षा हुई!
संयम लेते ही आप आगम अध्ययन में जुट गये व अपने अग्रज भ्राता तथा गुरुवर श्री रोशन लाल जी म.सा के साथ में रहते हुए , स्वाध्याय, सेवा, सरल स्वभाव का महान गुण लेकर विचरण किया! जीवन में कितनी ही तपस्या व कठोर संयम का पालन किया ! आपके जीवन के कंइ एसे प्रसंग भरे पड़े है कि आपकी मांगलिक से कइयो के स्वास्थ में सुधार हुआ ! आप को जीवन में धर्म के नाम पर आडम्बर बिल्कुल पसन्द नही था! आपके गुरु भ्राता स्पष्ट वक्ता श्री धर्म मुनि जी म.सा. हे!
तपस्वी राज श्री रोशन लाल जी म.सा अस्वस्थता के कारण साढे छः साल त्रिनगर दिल्ली स्थानक में रहे , आपने जो सेवा की उसकी सर्वत्र चर्चा हुई कि सेवा का गुण सिखना हो तो प्रेम चन्द जी म.सा से प्रेरणा लेनी चाहिये!
आपकी जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा के प्रति अटूट आस्था थी, आपका विशेष विचरण , पंजाब, हरियाणा, दिल्ली की तरफ रहा फिरभी उन्होने कुछ चातुर्मास , राजस्थान, मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र में भी कियें! सन 1986 का चातुर्मास धूलिया( महाराष्ट्र) में उपाध्याय श्री मूल मुनि जी( उस समय वह सलाहकार थे) के साथ किया! उपाध्याय श्री भी उनके उत्कृष्ठ संयम की प्रशंसा करते थे!
आप के प्रवचन सीधी सरल भाषा में आगम सम्मत होते थे!
जिन्द ( हरियाणा) में अपने गुरुभ्राता श्री धर्म मुनि जी से संथारा ग्रहण करके आप 21 मई 2015 को देवलोक हुए!
आपके वर्तमान में शिष्य श्री पदम मुनि जी म.सा हे, जो अभी पंजाब में विचरण कर रहे है! वे हर 21 तारीख को जंहा भी रहते है नवकार मंत्र का जाप करवाते है! निम्बाहेड़ा चातुर्मास श्री पदम मुनि जी का उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी के साथ था, आपने बहुत धार्मिक कार्यक्रम की प्रेरणा दी , अभी भी आपके दर्शन के लिये कई श्रावक – श्राविका जाते है!
एसे महान सन्त उप प्रवर्तक श्री प्रेम चंद जी म.सा के पुण्य स्मृति दिवस पर कोटिशः वंदन व श्रद्धा सुमन! आप जंहा भी हो कृपा बरसती रहे!