पूनावासियों की धर्मभावना काबिले तारीफ, तप-त्याग को समर्पित करें चातुर्मास- डॉ. समकितमुनिजी

  • आदिनाथ भवन में पड़े समकित के चरण, पुण्यनगरी पूना में गूंजे समकित के जयकारे
  • आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी का आदिनाथ भवन में चातुर्मासिक मंगलप्रवेश

पूना 25 जून (निलेश कांठेड़) । जैन धर्म एवं भगवान महावीर स्वामी के जयकारे के बीच सैकड़ो श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी में श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनि महारासा आदि ठाणा-5 ने पुण्यनगरी पूना के सतारा रोड स्थित श्री आदिनाथ जैन स्थानक भवन में वर्ष 2023 के चातुर्मास के लिए रविवार सुबह मंगलप्रवेश किया। समकितमुनि म.सा. के संग प्रेरणाकुशल श्री भवान्तमुनि मसा, सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा.,गायनकुशल जयवंतमुनि मसा, सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी ने भी चातुर्मासिक मंगलप्रवेश किया। मंगल प्रवेश शोभायात्रा सुबह 8.30 बजे मुकुंदनगर में वालचंदजी, भगवानदासजी संचेती के निवास से शुरू होकर श्री आदिनाथ स्थानक भवन पहुंची। मंगलप्रवेश शोभायात्रा में श्रावक-श्राविकाएं उमड़ पड़े। सफेद वस्त्रों के साथ सिर पर साफा धारण किए श्रावक हाथों में जैन ध्वजा लिए हुए चल रहे थे। श्राविकाओं ने भी केसरिया साड़ी पहन रखी थी। पूरे शोभायात्रा मार्ग में त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की, जैन धर्म की जय जयकार के साथ पूज्य समकितमुनिजी म.सा. का जयघोष भी होता रहा। मंगलप्रवेश शोभायात्रा मुख्य मार्गो से होते हुए श्री आदिनाथ स्थानक भवन तक पहुंची।
मंगल प्रवेश के अवसर पर धर्मसभा में पूज्य समकितमुनिजी ने अपने प्रवचन की शुरूआत श्रमणसंघीय सलाहकार पूज्य सुमतिप्रकाशजी महाराज के उत्तम स्वास्थय की कामना से पांच बार नवकार मंत्र उच्चारण के साथ की। उन्होंने पूनावासियों की धर्मभावना को काबिले तारीफ बताते हुए कहा कि इसी भावना के कारण आज ये चातुर्मास यहां संभव हो सका है। उन्होंने पूना को श्रमण संघीय आचार्य सम्राट आंनद ऋषिजी म.सा. की पवित्र भूमि बताते हुए उनका पावन स्मरण किया। मुनिश्री ने कहा कि चातुर्मास का महत्व उसके मिलने से नहीं बल्कि तप-त्याग व साधना के माध्यम से उसे कितना सार्थक बना पाते है इससे होता है। पूना का चातुर्मास एतिहासिक बने इसके लिए जरूरी होगा श्रावक-श्राविकाएं प्रतिदिन जिनवाणी श्रवण करने आदिनाथ भवन अवश्य पधारे। पूज्य मुनिश्री ने माता-पिता और गुरू सेवा की प्रेरणा देते हुए कहा कि जिन्होंने आप पर कृपा की उनकी तो क्रद करनी ही चाहिए। ऐसा नहीं करने से ही वृदाश्रम खुलने की नौबत आती है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास कोई दिखावा करने के लिए नहीं बल्कि चातुर्मास स्वयं को आईना बनाने के लिए है। मंगल प्रवेश के अवसर पर श्रद्धा-भक्ति का जो नजारा पेश किया गया है वह आगामी पांच माह तक बना रहे।
आई समकित की यात्रा आज नया उल्लास छाया है
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि वर्ष 2020 के बाद इस फिर चातुर्मास पांच माह का होने से भरपुर जिनशासन भक्ति का सुअवसर मिला है। पहले चातुर्मास ठाणा 3 का था लेकिन सरलमना विजयमुनिजी म.सा. एवं सेवाभावी भूषणमुनिजी म.सा. के भी साथ जुड़ने से अब चातुर्मास ठाणा पांच का हो गया है यानि माह भी पांच और ठाणा पांच होंगे। चौमासे के साथ संतों का भी बोनस मिल गया है। धर्मसभा में सरलमना विजयमुनिजी म.सा. ने गीत बोल-बोल रे ज्ञानी चौमासो आयो रे प्रस्तुत किया। गायनकुशल जयवंत मुनिजी म.सा. ने चातुर्मास से जुड़ने की प्रेरणा देने वाला गीत आई समकित की यात्रा आज नया उल्लास छाया है की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में महिला मण्डल की सदस्याओं ने मंगलाचरण एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत श्री आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टांटिया ने किया। आदिनाथ ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल नाहर ने चातुर्मास में होने वाले कार्यक्रमों की भूमिका बताई। समारोह में पूना जैन संघ के अभय छाजेड़, विलास राठौड़, विजयकांत कोठारी, माणक दुग्गड़, भीलवाड़ा शांतिभवन श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र चीपड़, जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा गोखरू, कर्नाटक अध्यक्ष रसीला मरलेचा, राजश्री पारख, सज्जन मासी, प्रवीण चौबुले आदि ने विचार व्यक्त करते हुए चातुर्मासिक सफलता की कामना की। आकुर्डी श्रीसंघ के सुभाष लालवानी ने वर्ष 2024 के चातुर्मास की विनती प्रस्तुत की। संचालन संजू भाऊ सांखला ने किया। मंगलपाठ के बाद श्रीसंघ द्वारा गौतम प्रसादी का आयोजन किया गया। मंगलप्रवेश समारोह के लिए भीलवाड़ा, बेगलूरू, हैदराबाद, नासिक, नंदुरबार, अजमेर, नई दिल्ली,पानीपत सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आस्थावान श्रावक-श्राविकाएं पूना पहुचे थे। पूना में जिस तरह समकित की यात्रा में सहभागी बन जिनशासन की सेवा से जुड़ने का उत्साह दिख रहा वैसा माहौल पहले कभी नहीं बना है। समारोह के अंदर भक्ति व श्रद्धारस की वर्षा होती रही तो बाहर आसमान से मेघ जमकर बरसते रहे।
पहली बार 1008 सामूहिक तेला तप से होगा चातुर्मास का स्वागत
पहली बार पूना महानगरी में किसी चातुर्मास का आगाज 1008 सामूहिक तेला तप की साधना से होने वाला है। पूज्य समकितमुनिजी ने कहा कि हमारा स्वागत तो हो गया अब चातुर्मास का स्वागत तप साधना से करना है। तेला तप की आराधना एक से तीन जुलाई होगी। इसकी शुरूआत एक जुलाई से शुरू होगी जबकि दूसरे दिन 2 जुलाई को चातुर्मास की विधिवत शुरूआत होगी। तीसरे दिन तीन जुलाई को गुरू पूर्णिमा पर्व होगा। उन्होंने कहा कि एक-दो तीन बोल कर्मो से फ्री हो जाओ। प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा. भी ने पूना के विभिन्न क्षेत्रों में विचरण के दौरान घर-घर पहुंचकर प्रेरणा दी। इससे 1008 तेला तप साधना का लक्ष्य तकरीबन पूरा हो रहा है लेकिन जिसकी भी भावना बने वह जुड़ सकता है। युवा श्रावक-श्राविकाएं भी इससे जुड़कर तेला तप साधना के लिए उत्साहित है। अब तक 21 से अधिक युवा दंपतियों ने सजोड़ा तपस्या करने के लिए अपने नाम लिखवाएं है। तेला तप करने वालों के पारणे की व्यवस्था श्रीसंघ की ओर से रहेगी।
प्रवचनमाला ‘कहानी द्रोपदी की कहानी कर्म की’ एक जुलाई से
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने बताया कि प्रवचनमाला ‘कहानी द्रोपदी की, कहानी कर्म की’ एक जुलाई से शुरू होगी। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक होगा। उन्होंने कहा कि ये कहानी द्रोपदी की नहीं होकर हम सभी की है। जब तक कर्म कहानी समझ में नहीं आएगी तब तक कर्म से मुक्त नहीं हो सकेंगे। इस अवसर पर प्रवचनमाला के टाइटल गीत का भी लोकार्पण किया गया। उन्होंने बताया कि चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन रात 8.30से 9.30 बजे तक श्री आदिनाथ स्थानक भवन में सर्वोतभद्र चौमुखी जाप का आयोजन होगा। दशो दिशाओं से कल्याण को बुलाने एवं पॉजीटिव एनर्जी खींचने के लिए सभी श्रावक-श्राविकाएं इस जाप से जुड़ने का भाव रखे। चातुर्मास में प्रत्येक चतुर्दशी को लोगस्स की आराधना होगी।
भीलवाड़ा हमारे दिल में बसा है
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने पिछले वर्ष भीलवाड़ा में हुए एतिहासिक चातुर्मास का जिक्र करते हुए कहा कि हम तो बस चार महीने गुजारने शांतिभवन गए थे पर मोहब्बत इतनी मिली की हम तो उनके दिवाने हो गए। भीलवाड़ा हमारे दिल में बसा है वहां के श्रावकों की भक्ति भावना हमेशा याद रहेगी। समारोह में समकितमुनिजी के भीलवाड़ा चातुर्मास के दौरान शांतिभवन अध्यक्ष रहे राजेन्द्रप्रसाद चीपड़ ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरूदेव ने भीलवाड़ा पर ऐसी कृपा बरसाई कि लोग उस चातुर्मास को कभी नहीं भूला पाएंगे। चातुर्मासिक प्रवेश कार्यक्रम में भीलवाड़ा से जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा गोखरू, सुश्रावक महावीर कच्छारा समकित की यात्रा के मीडिया समन्वयक निलेश कांठेड़, अमरसिंह धूपिया, मधु लोढ़ा, राजेन्द्र कोठारी, नवरतन मालू, अंतिमा कच्छारा, निर्मला बुलिया, जैन संस्कृति बाल तीर्थ भीलवाड़ा के अध्यक्ष हर्ष मेहता सहित कई श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।