श्रावक का जीवन परिवर्तन ही गुरु दक्षिणा है – आदित्य मुनि

रतलाम । राम महिमा महोत्सव के अंतर्गत आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब के आज्ञानुवर्ती शासन दीपक आदित्य मुनि जी महाराज साहब मैं गुरु पूर्णिमा के पावन प्रसंग पर गुरु की महिमा बताते हुए प्रवचन में फरमाया की श्रावक का चरित्र निर्माण , व्यक्तित्व निर्माण व जीवन में गुणशीलता होना ही सच्ची गुरु दक्षिणा है गुरु के प्रति आस्था ही सच्ची भक्ति है युवाओं के लिए प्रेरक उपदेश दिया की वर्तमान की परिस्थिति में बिना मोबाइल के टेक्निकली गाइड नहीं किया जा सकता उसी प्रकार सही गंतव्य पर गुरु के बिना पहुंचा नहीं जा सकता गुरु है तो सब कुछ है व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं बी उनके मार्गदर्शन से सुलजती हुई सही पड़ाव पर पहुंच जाती है व्यावहारिक व सांसारिक ज्ञान के गुरु माता-पिता होते हैं धार्मिक व संस्कारीक ज्ञान देने वाले हमारे गुरु भगवंत होते हैं हमे इस विशेष पसंद पर यह भी संकल्प लेना चाहिए की हमारी जैसी संगत होगी वैसी हमारी रंगत होगी इसलिए हम संगत ज्ञान व आचरण देखते हुए ही व्यक्तित्व को अपना मित्र बनाएं जिससे हमारे जीवन में कहीं भटकाव नहीं आए और विपरीत परिस्थिति में भी हम विचलित ना हो और अपने सिद्धांतों से डिगे नहीं उपरोक्त जानकारी देते हुए संघ के प्रवक्ता प्रीतेश गादिया ने बताया कि प्रवचन में समता या संघ के अध्यक्ष पंकज मूणत आशीष छाजेड़ आदि ने अपने भाव रखें साथी 200 से अधिक भाई बहनों के तेले की तपस्या आज पूर्ण हई सभा का संचालन संघ अध्यक्ष सुदर्शन जी पीरोदिया व मंत्री दशरथ बाफना ने किया।