पुण्य जब तक साथ देंगा हर कोई साथ, कमजोर पड़ने पर अपने भी हो जाते पराये- समकितमुनिजी

  • जीवन में पुण्य की टंकी भरने का कार्य करेंगी 8 जुलाई से 18 दिवसीय पुण्य कलश आराधना
  • आदिनाथ स्थानक परिसर में नियमित प्रवचनमाला कहानी द्रोपदी की, कहानी कर्म की

पूना, 4 जुलाई ( निलेश कांठेड़)। हम दिन रात कामना पुण्य पाने की करते है लेकिन मेहनत पैसा पाने के लिए करते है। पुण्य जब तक हमारे साथ हो हर कोई साथ देता है लेकिन द्रोपदी की तरह जैसे ही हमारा पुण्य कमजोर होता है अपने भी साथ छोड़ देते है। अपने पुण्य को बाहुबली बना दिया तो हर फील्ड में सफल होंगे। जीवन में थोड़ी मेहनत पुण्य कमाने के लिए भी कर ले। पुण्य की टंकी खाली होने पर कितनी भी भागदौड़ कर ले कार्य नहीं बनेगा। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने मंगलवार को पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित दैनिक प्रवचनमाला ‘कहानी द्रोपदी की, कहानी कर्म की’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने जीवन में पुण्य के महत्व की चर्चा करते कहा कि हमारे पुण्य की टंकी भरने का कार्य 8 से 25 जुलाई तक होने वाली 18 दिवसीय पुण्य कलश आराधना से होगा। जीवन में हर मोड़ पर खुशियां आपका स्वागत करे इस लक्ष्य से होने वाली इस आराधना के तहत एक दिन उपवास एवं एक दिन बिआसना की विधिपूर्वक आराधना होगी। जो भी श्रावक-श्राविकाएं इसमें सहभागी बनना चाहे वह श्रीसंघ को नाम दे सकते है। मुनिश्री ने कहा कि पुण्यकलश की आराधना ठीक से नहीं हो पाई तो समस्याएं आएगी। द्रोपदी का पुण्य कमजोर पड़ा तो हर पाल साथ देने का वादा करने वाले पांच पांडव पति के साथ भीष्म पितामह व द्रोणाचार्य जैसे महारथी भी विपदा का समय आने पर मुंह मोड़ गए। समकितमुनिजी ने कहा कि कोई रिश्तेदार हमसे मुंह फेरे तो यह मत समझना उसने मुंह फेरा बल्कि ये जान लेना कि हमारी पुण्यवानी मुंह मोड़ रही है। पाप उदय में आने पर कोई साथ नहीं चलता। जीवन में पुण्य के माध्यम से धर्म के रंग कैसे भरे जा सकते यह बात इस प्रवचनमाला के माध्यम से समझाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि हमे ये भी जांचना होगा कि हम पापानुबंधी पुण्य तो नहीं कर रहे है यानि ऐसा पुण्य जो पाप का एग्रीमेंट करे। पुण्य के पैसे से पाप खरीदना, पुण्य से मिली वाणी से निंदा करना, पुण्य से मिले कान से गलत सुनना व आंख से गलत देखना ऐसे ही पापनुबंधी पुण्य के लक्षण है। वर्तमान में दुनिया के अधिकतर लोगों के पुण्य पापनुबंधी हो गए है। धर्मसभा में गायन कुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘मन आंगन में पधारों म्हारे गुरूवर जी’ प्रस्तुत किया। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पूना के साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं श्रावक थे। संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक होगा। श्राविका मण्डल की ओर से ज्ञानदाता सुश्राविका सज्जन मासी का सम्मान-अभिनंदन किया गया।
तेला तप साधकों ने किए सामूहिक पारणा
चातुर्मासिक भव्य आगाज के रूप में आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में एक से तीन जुलाई तक 1008 सामूहिक तेला तप साधना महाकुंभ मंगलवार को सामूहिक तेला तप पारणा के साथ पूर्ण हुआ। आदिनाथ स्थानक भवन परिसर में नियमित प्रवचन के बाद सामूहिक पारणे का आयोजन किया गया। तपस्वियों ने पारणे से पूर्व पूज्य समकितमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के दर्शन कर वंदन-अभिनंदन किया। समकितमुनिजी ने सभी तपस्वियों को साधुवाद देते हुए कहा कि उन्होंने तपस्या की गंगा बहाकर चातुर्मास के शुरू में ही बहुत सुंदर माहौल निर्मित कर दिया है। तपस्या करने वालों में पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत श्रावक-श्राविकाएं शामिल थे। पूना से बाहर रहने वाले कई समकित भक्तों ने भी तेला तप के महायज्ञ में तपस्या रूपी आहूति दी। सामूहिक तेला तप पारणा के लाभार्थी रविन्द्र-रंजना नाहर एवं परिवार का धर्मसभा में आदिनाथ श्रीसंघ की ओर से स्वागत-अभिनंदन किया गया।
बंधन से आजाद करते है प्रत्याख्यान
धर्मसभा में आगमज्ञाता समकितमुनिजी म.सा. ने प्रत्याख्यान का महत्व बताते हुए कहा कि इन्हें स्वीकार करने से इच्छाओं का निरोघ होता है। जितने अधिक प्रत्याख्यान लेंगे उतनी इच्छाएं कम होती जाएगी इसीलिए महापुरूष प्रत्याख्यान पर जोर देते है। उन्होंने कहा कि कई लोग बंधन में नहीं बंधने का तर्क देकर प्रत्याख्यान लेने के प्रति अनिच्छा जताते है पर शायद उन्हें अहसास नहीं है कि बंध होने के कारण ही वह संसार में है अन्यथा प्रत्याख्यान तो बंधन तोड़ने के लिए होता है। जिस दिन ये समझ में आ गया कि प्रत्याख्यान बांधते नहीं बल्कि आजाद करते है उस दिन हमारी प्रत्याख्यान लेने की इच्छा होगी। इच्छाओं पर नियंत्रण कर लेने वाला धर्मपथ पर आगे बढ़ जाता है।
गलती का बचाव नहीं करता समकित यात्री
धर्मसभा में पूज्य समकितमुनिजी ने समकित यात्री बनने के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि समकित की यात्रा मोक्ष नहीं है पर मोक्ष की दिशा में ले जाने पर मोहर लगाती है। इस चातुर्मास में यह मोहर लग गई तो आपका ओर हमारा यहां आना सफल हो जाएगा। समकित यात्री पाप करने से बचता है ओर कोई गलती हो भी जाए तो उसका बचाव करने की बजाय स्वीकार कर लेता है। गुस्सा छोड़ना चाहता पर अनादि जन्म के संस्कार होने से नहीं छोड़ पाता है लेकिन जानता है कि ये पाप का कारण है। समकित यात्री बनने पर भवसागर पार करने के नजदीक पहुंचा जा सकता है।
चातुर्मास में हर गुरूवार सुबह होगी आगम आराधना
चातुर्मास में प्रत्येक गुरूवार को सुबह 8.45 से 9.15 बजे तक आगम आराधना होगी। इसके माध्यम से जीवन के हर कष्ट का निवारण करने वाली आगम गाथाओं का निचोड़ पेश किया जाएगा। हर शुक्रवार को एकासना तप के साथ प्रत्येक रविवार को विशेष प्रवचन होगा। आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है। दसों दिशाओं से कल्याण को बुलाने एवं पॉजीटिव एनर्जी खींचने वाले सर्वप्रकार से कल्याणकारी एवं प्रभावशाली सर्वोतभद्र चौमुखी जाप करने के लिए पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं आदिनाथ सोसायटी स्थानक भवन प्रागंण पहुंच रहे है। शनिवार एवं रविवार को दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला होगी। इसका विषय ‘‘क्या करें ऐसा कि प्रॉफिट (फायदा) हो जाए दोगुणा’’ रहेगा।