वाजते गाजते धूमधाम से ग्रंथ शोभायात्रा एव चातुर्मासिक कलश स्थापना की गई

तलेगांव । परोपकार सम्राट आचार्यप्रवर श्री ऋषभचंद्र सुरीश्वरजी म.सा‌. के आज्ञानुवर्ती शिष्य श्री पीयूषचंद्र विजयजी,श्री रजतचद्र विजयजी, श्री प्रीतियश विजयजी आदि ठाणा के परमपथ चातुर्मास का यशस्वी आगाज़ तलेगांव श्रीसंघ में वाजते गाजते धूमधाम से चातुर्मासिक कलश स्थापना मूर्ति एवं ग्रंथ शोभायात्रा से प्रारंभ हुआ। शोभायात्रा हस्तीमलजी सोलंकी के हस्तगिरी भवन से प्रारंभ होकर बग्गीया रुपी रथ में लाभार्थी विराजे थे। जीरावला दादा के दरबार पहुंचे। वहां कलश के लाभार्थी श्रीमती निताबेन इंद्रमल द्वारा कलश स्थापित किया गया। वहीं गुरू गौतम स्वामीजी की मूर्ति आकाशजी जैन ,श्री राजेंद्र सूरीजी की मूर्ति हेमाबेन अजयजी सोलंकी ,श्री ऋषभचंद्र सूरिजी की प्रतिमा यश प्रवीणजी सोलंकी द्वारा स्थापित की गई।
सकल संघ ने सामुहिक गुरुवंदन किया। श्री पीयूषचंद्र विजयजी ने ध्यान कराते हुए चातुर्मास का महत्व बताया । धर्म जागृति का संदेश दिया। गौतमस्वामीजी की आरती अनिता बेन रविंद्रजी सोलंकी एवं श्री राजेंद्रसूरीजी की आरती का लाभ अनिलजी मेहता परिवार को मिला।
गुरु पूर्णिमा पर्व
धर्मसभा प्रागंण को पार्श्व दिव्य महिला मंडल द्वारा सुंदर सजाया गया गुरुवंदन व मंगलाचरण किया गया। पार्श्व दिव्य मंडल व विरती मंडल ने सुंदर गीत प्रस्तुत किये ।श्रीसंघ अध्यक्ष अनिलजी महेता एवं गुरुभक्त महिला ने गुरु महिमा प्रस्तुति की। बाल मंडल ने सुंदर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। श्री प्रीतियश विजयजी ने गुरु का महत्व बताया। श्री पीयूषचंद्र विजयजी ने गुरु महिमा का वर्णन किया। अज्ञान अंधकार को दुर करने वाले गुरू होते हैं। सच्चे गुरु वो ही जो भक्त के चित्त पर ध्यान दें, वित्त पर नहीं । गुरु पूर्णिमा के पावन प्रसंग पर चांदी के पादुका को वासक्षेप पूजा का लाभार्थी श्री धनराजजी पुखराज जी परमार सचिन भाई एवं पुष्प पूजा के लाभार्थी श्री पारसमलजी बाबूलालजी सोलंकी एवं श्री गौतम स्वामीजी की आरती के लाभार्थी हस्तीमलजी बाबुलालजी सोलंकी इंदरभाई एवं श्री राजेंद्रसूरीजी की आरती का लाभार्थी राजेंद्र मोहनलालजी परमार थे। कार्यक्रम का शानदार संचालन मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी मसा ने किया।