
रांची। जैन गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान दिनांक 06 जुलाई को शिक्षण शिविर मे अपनी वाणी से सभी शिक्षार्थियों को ग्रंथ के प्रथम अध्याय का सार बताते हुए कहा -आर्यिका गणिनी विभाश्री माताजी ने तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ के प्रथम अध्याय मे बताया कि उन सभी प्रशस्त मोक्ष मार्गियो को नमस्कार करते हुए जिन्होंने रत्नत्रय धारण कर जीवों को मार्ग दर्शाया है, सात तत्वों का वर्णन किया है जिससे कि पाठक को मोक्ष, बंध, पाप, पुण्य, संवर, निर्जरा एवं जीव का बोध हो। साथ ही साथ जीव का लक्षण, ज्ञान, ज्ञान के प्रकार, महत्व एवं आत्मा के अस्तित्व का बोध कराया है। माताश्री ने कहा सम्यकदर्शन, सम्यकज्ञान, और सम्यकचारित्र ही मोक्ष मार्ग है । पूरे विश्व में जितना भी ज्ञान है जैसे भूगोल,खगोल, ज्योतिष,जीव विज्ञान, कुण्डली ज्ञान आदि सभी भगवान के केवलज्ञान से प्रकट हुआ है।जैन आगम में आत्मा को सम्पूर्ण परमात्मा स्वरूप माना जाता है। आत्मा बीज रूप है जो स्वयं ही पुरुषार्थ करके परमात्मा बन जाता है। शुद्ध भावों से की गई कोई भी धार्मिक क्रिया हमारी आत्मा का कल्याण करती है, रुधिर मल को जैसे जल धो देता हैं वैसे ही भगवान की पूजा और गुरुजनों की सेवा हर गृहस्थ के पापों का नाश करती है।पूजा करने वाला संपूजक और पुजा की व्यवस्था करने वाला प्रतिपालक होता है ,महामंत्र णमोकार की महिमा बताते हुवे अपने आज के प्रवचन को विराम दिया।
प्रातःकालीन शांतिधारा के बाद ग्रंथ जिनसहस्त्रनाम के मंत्रो के साथ शान्तिधारा हुई । उसके बाद आर्यिका श्री का सभागार में आगमन हुआ । फिर 7.30 बजे से शिक्षण शिविर प्रारम्भ हुआ, प्रवचन 8.15 बजे प्रारम्भ हुआ। फिर संध्या 6.00 भक्तामर स्त्रोत्र का वाचन हुआ,उसके बाद गुरु भक्ति,मन की आनन्द यात्रा, आरती हुई। कल 06/07/2023 को प्रातः 6.15 बजे से जिनसहस्त्रनाम स्त्रोत मंत्रोचार के साथ शांतिधारा होगी।प्रातः 7.30 बजे से शिक्षण शिविर, और 8.15बजे से प्रवचन वासुपूज्य जिनालय में होगा। सन्ध्या में गुरुभक्ति, जिज्ञासा समाधान, एवम् आरती 6.00बजे से हाेगी। रांची संदीप जैन ,कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा ने उक्त जानकारी दी।