रतलाम। राम महिमा महोत्सव के अंतर्गत शासन दीपक आदित्य मुनि जी महाराज साहब द्वारा ज्ञान दर्शन चरित्र तप का विशेष महत्व आगम सूत्र के हिसाब से बताया गया जिसमें दर्शन का अर्थ है श्रद्धा भाव, शुद्ध श्रद्धा भक्ति के बिना संभव नहीं भगवान, परमात्मा ,गुरु ,आदि से प्रीत भक्ति करके श्रद्धा रखकर दर्शन को समझा जा सकता है l क्योंकि सांसारिक रिश्ता माता पिता पत्नी भाई बहन दोस्त पुत्र पुत्री आदि से यह सिर्फ वर्तमान भव के लिए हे परंतु परमात्मा से रिश्ता अनंत भव तक रहता है इसलिए जो श्रद्धा भक्ति करता है उसको सम्यक दर्शन होता है, बिना दर्शन के ज्ञान की प्राप्ति नहीं, चरित्र का उन्मूलन नहीं, उसके बिना तप का भाव संभव नहीं , गाथा में भगवान को भक्तों ने अपने प्रियतम का रूप दिया है उनकी भक्ति में लीन होना ही उसने सम्यक दर्शन को प्राप्त करने का मार्ग समझा है बिना सम्यक ज्ञान, दर्शन ,चरित्र के मोक्ष की प्राप्ति नहीं है। उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि प्रवचन में प्रति गुरुवार शुक्रवार को सम्यक दर्शन के विषय रहेंगे , इस अवसर पर संघ अध्यक्ष श्री सुदर्शन जी पीरोदिया ने बताया कि महाराज साहब ने रविवार का विषय संडे इस फंडे का दिया है जिसमें युवाओं को धर्म का बोध आनंद के साथ कराया जाएगा सभा का संचालन मंत्री दशरथ बाफना द्वारा किया गया आगामी शिविर की जानकारी समता बहू मंडल की अध्यक्षा प्रीति मूणत द्वारा दी गई।