




इंदौर जैन दिवाकर विद्यानिकेतन 7 जुलाई 2023। बिना धागे की सुई छेद ही करेगी वैसे ही बिना संस्कार के सिखा गया ज्ञान विनाश का ही काम करता है। संस्कृति की रक्षा से ही संस्कारों का निर्माण होगा। उक्त विचार राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश ने जैन दिवाकर विद्या निकेतन न्यू पलासिया में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं होता है बल्कि अपने कर्तव्यों का बोध होना अत्यंत आवश्यक है। मुनि कमलेश ने बताया कि पैतृक संस्कारों की नीव जितनी मजबूत होगी उसमें भी मां के गर्भ में मिले संस्कार अमिटऔर दीर्घायु होते हैं।
राष्ट्रसंत ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी नशा के गिरफ्त में ना आए। जैन संत ने कहा कि सभी धर्मों के समान आध्यात्मिक ज्ञान वैज्ञानिक ढंग से विश्व के कोने कोने में पहुंचाने से ही विश्व शांति आएगी। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच दिल्ली की ओर से प्रश्न मंच का आयोजन किया गया विजेताओं को पुरस्कार दिया गया।
इस अवसर पर शरद मेहता, रमेश भंडारी, नरेन्द्र धाकड़, अशोक मंडलीक, प्रकाश भटेवरा, हेमंत बोहरा, महेन्द्र डागरिया, सुरेश मेहता, जिनेश्वर जैन, आदि समाजजन उपस्थित थे। आभार अशोक मंडलीक ने व्यक्त किया।