जब पांव नहीं दिल थक जाते है तो रिश्ते व रास्ते सब बंद हो जाते है- समकितमुनिजी

  • मंजिल तक पहुंचना है तो दूसरों का सहारा नहीं लेकर अपने कदमों का इस्तेमाल करें आदिनाथ स्थानक परिसर में नियमित प्रवचनमाला कहानी द्रोपदी की, कहा कर्म की

पूना 7 जुलाई (निलेश कांठेड़)। हम आत्मकल्याण का लक्ष्य पाना है तो पुण्य बचाने भी होंगे ओर पुण्य कमाने भी होंगे। पुण्य बचाने के दो रास्ते है साधनों का कम से कम उपयोग करना ओर अपना कार्य खुद करना। पुण्य कमाने के दो रास्ते है दान करना एवं शुभ योग रखना। जब पांव नहीं दिल थक जाते है तो रिश्ते व रास्ते सब बंद हो जाते है। इसलिए शुभ मन रखने की बहुत जरूरत है। दूसरों के सहारे कुछ देर चल सकते पर मंजिल तक पहुंचना है तो अपने कदमों का इस्तेमाल करना होगा। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शुक्रवार को पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में दैनिक प्रवचनमाला ‘कहानी द्रोपदी की, कहानी कर्म की’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ज्ञान,दर्शन व चारित्र में जो श्रम करें उसे श्रमण कहा गया है इसी तरह श्रावक भी कभी श्रम करना नहीं छोड़े। घर में काम करना बंद करना सौभाग्य नहीं दुर्भाग्य का सूचक है। इस कारण जो बीमारियां पहले 70 वर्ष के बाद आती थी वह अब 40 के बाद ही नजर आ रही है। मुनिश्री ने कहा कि घर से आधा-एक किलोमीटर दूर तक भी पैदल चलने की आदत तकरीबन छूट जाने से सुबह का जो वक्त पूजा-पाठ में लगना चाहिए वह दौड़ने में लगाना पड़ रहा है। बहुत सी बीमारियां कर्म की नहीं हमारी नासमझी की देन होती है। ऐसी बीमारियों के कारण हमारा पुण्य क्षय होता है। समकितमुनिजी ने कहा कि जहां तक संभव हो अपना काम खुद करे इससे पुण्य बचता है। पुण्य सुरक्षित तो स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा। धर्मसभा में गायन कुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘मेरे दुःख के दिनों में ये बड़े काम आते है’ प्रस्तुत किया। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में सुश्राविका अरूणा सुराणा, स्नेहा गुगलिया, गरिमा छाजेड़ ने 7-7 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। कई श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन, आयबिंल, उपवास के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा में पूना के साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक होगा।
बच्चों को प्रेरित करें सप्त कुव्यसन त्याग के लिए
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि संतान का भविष्य सुरक्षित होने पर हमारा भी भविष्य सुरक्षित हो जाता है। बड़ी हैरानी की बात है कि सर्वाधिक फिसलनभरी 13-14 से 22-23 वर्ष की उम्र जिसमें बच्चों को अपने पास रखना चाहिए उसमें पढ़ाई व कॅरियर के नाम पर अपने से दूर कर देते है। इसके दुष्परिणाम भी हर चौथा-पांचवा परिवार भोग रहा है फिर भी इस दौड़ को हम छोड़ नहीं पा रहे है। पहले बच्चों को 12-13 वर्ष की उम्र में ही गुरूदेव के पास ले जाकर सप्त कुव्यसनों का त्याग कराया जाता था लेकिन अब वह भी बंद हो चुका है। उन्होंने बताया कि वर्तमान माहौल को देखते हुए बच्चों को धर्म का टीका लगाने के लक्ष्य से चातुर्मास के तहत 9 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए सप्त कुव्यसन त्याग शिविर का आयोजन 16 जुलाई को दोपहर 2.30 से 4 बजे तक किया जाएगा। शिविर के लिए कोई शुल्क नहीं होगा पर भाग लेने वालों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
देवताओं से भी दुर्लभ मानव जन्म
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि देवता बनने से भी दुर्लभ मानव जन्म मिलना है। मानव जीवन का मूल्यांकन पैसे व ताकत से नहीं हो सकता। मानवता के साथ श्रद्धा व पराक्रम होने से ही कार्य सिद्ध होता है। आगम कहता है कि देवता आगे नहीं बढ़ सकते लेकिन मानव आगे जा सकता है। उन्होंने कहा कि आगम बताता है कि मानव जीवन का कैसे उपयोग करना है। आगम के टीके बचपन में ही लगा लिए तो पूरी जिंदगी सुरक्षित रहेंगे। आगमवाणी 24 कैरेट गोल्ड है जिसमें कोई मिलावट नहीं है। जिसकी धर्म में रूचि नहीं है वह जिनवाणी ओर आगम श्रवण कर लेगा तो विवेक उसकी वाणी में झलकने लगेगा।
सैकड़ो श्राविकाओं ने की एकासन तप आराधना
चातुर्मास के तहत शुक्रवार को सर्व दुःख हरणे वाली माता पद्मावती की आराधना में एकासना तप का भी आयोजन किया गया। इसके तहत सैकड़ो श्राविकाओं ने एकासन तप की आराधना की। सामूहिक एकासन की व्यवस्था आदिनाथ श्रीसंघ द्वारा की गई थी। चातुर्मास के तहत आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है। इसमें भी प्रतिदिन आदिनाथ सोसायटी सहित पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं भाग लेेकर पुर्ण्याजन कर रहे है।
पुण्य कलश आराधना का आगाज शनिवार से
समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि हमारे पुण्य का खजाना भरने का कार्य का आगाज शनिवार से शुरू होने वाली 18 दिवसीय पुण्य कलश आराधना से होगा। जीवन में हर मोड़ पर खुशियां आपका स्वागत करे इस लक्ष्य से 25 जुलाई तक होने वाली इस आराधना के तहत एक दिन उपवास एवं एक दिन बिआसना की विधिपूर्वक आराधना होगी। इस आराधना में भाग लेने के इच्छुक श्रावक-श्राविकाओं को अपना रजिस्ट्रेशन जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन भी ये आराधना की जा सकती है लेकिन वह इस अभियान का हिस्सा नहीं होंगी। जिन श्रावक-श्राविकाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया होगा उन्हें 8 से 25 जुलाई तक प्रतिदिन प्रवचन के बाद पुण्य कलश आराधना होगी ओर इसमें पुण्य बचाने एवं बढ़ाने के बारे में प्रेक्टिकल भी कराया जाएगा।
शनिवार से दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने बताया कि शनिवार एवं रविवार को दो दिवसीय विशेष प्रवचनमाला होगी। इसका विषय ‘‘क्या करें ऐसा कि प्रॉफिट (फायदा) हो जाए दोगुणा’’ रहेगा। ये भी हमारे पुण्य बचाने एवं पुण्य बढ़ाने के अभियान का ही हिस्सा रहेगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्रवचन सुनने आने वाला स्थानकवासी परम्परा के प्रत्येक श्रावक-श्राविका दो-दो सामायिक करने का लक्ष्य रखे। सब मिलकर सामायिक साधना करेंगे तो कितनी सामायिक होगी सोच भी नहीं सकते। इन दो दिन में इतनी सामायिक साधना हो कि आदिनाथ सोसायटी का संदेश केवल पूना में नहीं बल्कि पूरे देश में गूंजे।