उपाध्याय श्री केवलमुनि जी मसा की जन्म जयंती त्याग तपस्या के साथ मनाई गई

रतलाम । जीवन में किस प्रकार शुद्धता एंव पवित्रता लाई जा सकती है यह समझाने का प्रयास प्रभु महावीर ने किया है । ग्रहस्थ अवस्था में रहते हुए भी व्यक्ति प्रभु के श्रावक को बताए गए मार्ग पर चलकर महान बन सकता है। भारत देश ऋषि प्रधान देश है। सन्तो का देश है, जितने सन्त महापुरुष भारत देश में हुए है उतने दुनिया में कँही नही हुए है। सन्त अपकारी पर भी उपकार के भाव रखता है। सर्वे भवन्तु सुखीन ये भावना सदैव सन्त के मन में रहती है।
ऐसे ही एक सन्त दिवाकर परम्परा के दैदीप्यमान नक्षत्र उपाध्याय प्रवर श्री केवल मुनि जी मसा की आज जन्म जयंती है । आप परम पूज्य जगत वल्लभ जैन दिवाकर श्री चौथमल जी म.सा. के शिष्य थे। आपने लगभग पूरे भारत में विहार करते हुए धर्म प्रचार प्रसार किया।
माता कंकुबाई कोठारी ने बचपन से ही आपको धार्मिक संस्कार दिए। मात्र 11 वर्ष की उम्र में आपने ब्यावर नगर में दिक्षा ग्रहण की । आपकी माताजी और भाई ने भी दिक्षा ग्रहण की । उत्तर में हिमाचल एंव कश्मीर दक्षिण में कन्याकुमारी तक एंव उड़ीसा, मप्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल चारों दिशाओं में आपने विहार करते हुए धर्म की प्रभावना की।
अपने गुरु जैन दिवाकर जी के प्रति आपकी अनन्त श्रद्धा थी । आपने इंदौर में श्री जैन दिवाकर विद्या निकेतन एंव बेंगलोर में भगवान महावीर कालेज तथा कोशीथल में कंकु स्मृति विद्यालय की स्थापना करवाई। आपने शास्त्रों एंव आगमों का गहन अध्य्यन किया एंव लगभग 35 उपन्यास लिखे एंव कई भजनों की रचना की । इंदौर नगर में आपको उपाध्याय पद की पदवी प्रदान की गई। इसके अलावा आपको कवि रत्न, उपन्यासकार, साहित्य मनीषी आदि कई अलंकरो से विभूषित किया गया। 20 मई 1994 को बैंगलौर में संथारा पूर्वक आपका देवलोक गमन हुआ। परम पूज्य उपाध्याय श्री केवल मुनि जी म.सा. की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में सामूहिक दया एंव एकासन का कार्यक्रम रखा गया जिसके सम्पूर्ण लाभार्थी स्व. श्री शांतिलालजी मांडोत की स्मृति में श्रीमती रतनबाई मांडोत परिवार रहे। प्रभावना का लाभ हीराबेन गांधी (अहमदाबाद) ने लिया। 12 घण्टे के अखंड नवकार मंत्र के जाप जो की नीमचौक में चल रहे के आज के लाभार्थी मोतन बाई रखबचन्द जी कटारिया परिवार एंव दिनाँक 16 जुलाई रविवार के जाप विजयकुमार फूलचंद कटारिया परिवार की और से रखे गए है।