- जख्म हम खुद देते और दूसरों से कहते सॉरी बोल
- आदिनाथ सोसायटी पारख धर्मसभा मण्डप में ‘दिल तो बच्चा है’ विषय पर विशेष प्रवचन

पूना, 23 जुलाई (निलेश कांठेड़)। हम बच्चों जैसी जिंदगी जीना भूल गए है। बच्चें लड़ते है ओर मिनटों में भूल फिर एक हो जाते है। वह हमारी तरह गांठ बांध कर नहीं बैठ जाते है। बच्चें हमेशा प्यार वाले होते है गिव एंड टेक वाली कल्चर यानि देना ओर लेना वाली संस्कृति उनकी नहीं हमारी है। ये सिस्टम दिल वालों का नहीं दिमाग वालों का है। दिल वाले की चाहत रहती मुझे देना है ये नहीं सोचता है कि सामने वाला उसको क्या दे रहा है। परमात्मा को पाने की चाहत है तो जिंदगी को बच्चों जैसी बना लो यानि भूलक्कड़ बन जाओ ओर गिव एंड टेक कल्चर से खुद को बचाओ। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख धर्मसभा मण्डप में रविवार को श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने विशेष प्रवच ‘दिल तो बच्चा है’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते है। बच्चा कुछ देर के लिए रूठ जाता है लेकिन वह क्रोध का आचार नहीं डालता। केरी का आचार एक वर्ष चलता पर गुस्से का आचार वर्षो तक चलता है यानि मिथ्यात्व में पहुंच सम्यकत्व खत्म कर लेते है। मुनिश्री ने कहा कि बहुत बार अनबन होती है तो आंखे भी रोती है ओर मन भी रोता है। जब तक सामने वाला सॉरी नहीं बोले रोत रहेंगे ओर कहेंगे उसने मुझे हर्ट किया है। हम अपनी खुशी की चाबी किसी ओर के हाथ में दे देते है। जख्म हम खुद देते ओर दूसरों से कहते है सॉरी बोल। समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि समकित यात्री गलत करता है तो उसे कभी सही नहीं समझता है। पाप को पाप के रूप में स्वीकार करना ही समकित यात्री का कार्य है। ऐसा करते समय मन में पश्चाताप की भावना रहनी चाहिए। जिस दिन हम गलत को गलत ओर पाप को पाप मान लेंगे ये होना कम हो जाएंगे। ऐसा करना ही समकित यात्री बनने की शुरूआत है। धर्मसभा के शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने भजन ‘पुण्य कलश तप पायोजी, गुरू कृपा धन पायोजी’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल श्री भवान्तमुनिजी म.सा.,सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा.,सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पूना के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है। चातुर्मास के तहत आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है।
गुस्सा नेचुरल कैसे हो सकता वह स्वभाव नहीं विभाव है
समकितमुनिजी म.सा. ने परमात्मा महावीर व सर्प चण्डकौशिक का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई हमे नफरत, घृणा दे तो हमे उसे बदले में प्रेम व स्नेह देना चाहिए यहीं परमात्मा का मार्ग है। इस मार्ग पर नहीं चल पाना हमारी कमजोरी है पर मार्ग वहीं सही है। कई बार हम अपने गुस्से को जायज ठहराते है पर गुस्सा कभी सही नहीं हो सकता। हम बोलते गुस्सा आना तो नेचुरल है पर गुस्सा कभी नेचुरल नहीं हो सकता। आत्मा का स्वभाव गुस्सा नहीं क्षमा है। गुस्सा तो विभाव है जिसे हम स्वभाव बता जायज ठहराने का प्रयास करने लगे है। गुस्सा कर रहे वह ठीक है लेकिन उसे गलत ही समझना होगा सही नहीं ठहराए।
तपस्वी के मासखमण के सम्मान में समकितमुनिजी पहली बार करेंगे तेला तप
धर्मसभा का माहौल उस समय भावपूर्ण हो गया जब पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने 23वें उपवास का प्रत्याख्यान ग्रहण कर रहे युवा विजय संपतराज कवाड़ की अनुमोदना करते हुए कहा कि उन्होंने जिंदगी में अब तक तेला तप नहीं किया है लेकिन मैने इनसे वादा कर लिया है कि आपके मासखमण का सम्मान मैं तेले से करूंगा। उन्होंने कहा कि धन कमाने की उम्र में धर्मसाधना कर रहे ऐसे युवा साथी जिनशासन का गौरव एवं शान है। बहुत से ऐसे गृहस्थ होते है जो संत से भी श्रेष्ठ हो जाते है। हमने तो श्रीसंघ से तेले तप मांगे थे लेकिन ये देख अति प्रसन्नता हो रही है कि मासखमण का तेला हो रहा है। सुश्रावक वर्धमान कोठारी एवं सुश्राविका नीलम प्रेेम वेदमुथा भी 23वें उपवास के साथ मासखमण की दिशा में गतिमान है। समकितमुनिजी ने तपस्याओं का ठाठ लगने का श्रेय प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा. के पुरूषार्थ को देते हुए उनके लिए भी मंगलकामना व्यक्त की।
ओपन बुक एग्जाम में मलारकोटला की बिन्नी जैन प्रथम
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने धर्मसभा में समकित के संग समकित की यात्रा के तहत प्रकाशित पिछली पुस्तक ‘‘सीक्रेट ऑफ वैलनेस’’ के आधार पर आयोजित ओपन बुक एग्जाम का परिणाम घोषित किया। इस परीक्षा में भारत के 25 राज्यों के करीब 2700 समकित यात्री शामिल हुए थे। इसमें 298 अंक प्राप्त कर मलारकोटला पंजाब की बिन्नी करण जैन ने प्रथम स्थान प्राप्त कर गुरू सुमति पुरस्कार प्राप्त किया। परीक्षा में द्वितीय स्थान प्राप्त कर 17 जनों ने गुरू विशाल पुरस्कार प्राप्त किया। इनमें प्रीति जैन नोएडा, आशारानी जैन भटिण्डा, विशिता गुप्ता नोएडा, प्रतिभा सुराना भोपाल, अंजू भण्डारी भीलवाड़ा, प्रमिला पोखरना धूलिया, रेखा छाजेड़ भीलवाड़ा, सुशीला बाबेल जयपुर, वंदना बोहरा अंकलेश्वर, नम्रता भण्डारी अंकेलश्वर, अरूण जैन रोहतक, रिचा गोयल मोगा, रितु नोहरिया मोगा, सुवृष्टि जैन लुधियाना, हेमलता श्रीश्रीमाल रायपुर, सरोज जैन नोएडा, प्रियंका धूपिया उधना शामिल है। इसी तरह तृतीय स्थान प्राप्त कर 31 जनों ने गुरू आशीष पुरस्कार प्राप्त किया। इनमें संतोष रांका भीलवाड़ा, सुलेखा सांखला अजमेर, प्रगति चौधरी भीलवाड़ा, तृप्ति कच्छारा जयपुर, दीपा जैन भीलवाड़ा, पूनम जैन नोएडा, प्रोमिला जैन लुधियाना, प्रियांशी जैन भीलवाड़ा, सुरभि जैन भवानीमंडी, सोनिका जैन भटिण्डा, अंजू जैन मेरठ, कुसुम फोफलिया जयपुर, आशा भण्डारी भूपालसागर, अनिता रांका जयपुर, ज्योति शाह गौरेगांव-ईस्ट, रूचिता जैन भवानीमण्डी, अलका गोलेच्छा भवानीमंडी, आशिता गोखरू भीलवाड़ा, मैना रांका भीलवाड़ा, संगीता सुराणा भीलवाड़ा, सुनील जैन अंबाला, सुरज बंसल भटिण्डा, ललिता पोखरना बेंगू, सपना हिंगड़ मैसूर, पूनम जैन फरीदकोट, महेन्द्र सुमन पाली, शिल्पा नाहर सूरत, शिल्पा लोढ़ा उधना, कल्पना धाकड़, गुरूग्राम एवं राजकुमार बांठिया पाली शामिल है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को कॉमन पुरस्कार पूना के पारख परिवार की ओर से प्रदान किया गया है।
चित्तौड़गढ़ चातुर्मास का स्मरण,दिवाकर महिला परिषद की सराहना
इस ओपन बुक एग्जाम का समन्वय चित्तौड़गढ़ की जैन दिवाकर महिला परिषद ने किया था। परिणाम घोषणा के अवसर पर परिषद की अध्यक्ष अंगूरबाला भड़कत्या, नगीना मेहता एवं निर्मला नाहर का श्री आदिनाथ संघ की ओर से राजश्री पारख आदि श्राविकाओं ने स्वागत-सम्मान किया। पूज्य समकितमुनिजी ने दिवाकर महिला परिषद की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ के वर्ष 2021 के एतिहासिक चातुर्मास को नई उंचाईयों तक पहुंचाने में श्रीसंघ के साथ दिवाकर महिला परिषद ने अहम भूमिका निभाई। संगठन तब से इस ओपन बुक एग्जाम को संचालित करने में सराहनीय सेवाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने सभी के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं व्यक्त की। इस मौके पर चित्तौड़गढ़ से पधारे सुश्रावक राकेश मेहता का भी सम्मान किया गया। समकित साहित्य प्रकाशन के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाने वाली पूना की सरिता मुणेत एवं मैसूर की नैना जैन का भी सम्मान किया गया।
सद्गुरू सुमति प्रकाशन की लॉचिंग एवं नई पुस्तक आओ साथ चले का विमोचन
धर्मसभा में वर्ष 2017 से समकित साहित्य प्रकाशन की कड़ी में छठी पुस्तक के रूप में ‘‘आओ साथ चलें’’ (केशी- गौतम संवाद) भाग प्रथम का विमोचन आदिनाथ श्रीसंघ के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया, कार्यकारी अध्यक्ष अनिल भाउ नाहर सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों, सुश्रावकों व सुश्राविकाओं ने किया। इस पुस्तक की लॉचिंग में मुख्य सहयोग पूना के नाहर व पारख परिवार का रहा। इस पुस्तक के आधार पर ही आगामी ओपन बुक एग्जाम होगा। पुस्तक विमोचन से पूर्व समकित साहित्य प्रकाशन के क्षेत्र में नवाचार के रूप में ‘सद्गुरू सुमति प्रकाशन’ केन्द्र शुरू करने की घोषणा कर इसके लोगो की भी विधिवत लॉचिंग की गई। पूज्य जयवंतमुनिजी ने इस प्रकाशन से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया कि आगम ज्ञान आधारित समकित साहित्य जन-जन तक पहुंचाने के उद्ेश्य से इसकी शुरूआत की जा रही है। अभी तक समकित साहित्य हिंदी में ही प्रकाशित होता है इस केन्द्र के माध्यम से अंग्रेजी, गुजराती, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी इसके प्रकाशन का विचार है। तपस्वियों का सामूहिक वरघोड़ा कल निकाला जाएगा
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. का चातुर्मास शुरू होने के बाद तप साधना करने वाले तपस्वियों के सम्मान में आदिनाथ श्रीसंघ के तत्वावधान में आयोजित तपस्वी अनुमोदना सप्ताह के तहत रविवार को तपस्वियों को मेहंदी लगाने की रस्म हुई। अनुमोदना गीतों की गूंज के बीच तपस्वियों के भक्ति भाव के साथ मेहंदी लगाई गई। तपस्वियों का सामूहिक वरघोड़ा (शोभायात्रा) 24 जुलाई सोमवार को सुबह 7.30 बजे पारख भवन से शुरू होकर आदिनाथ स्थानक भवन पहुचेंगा। महोत्सव का समापन 25 जुलाई को पुण्य कलश आराधना की पूर्णाहुति (पचक्खावनी) के साथ होगा। चातुर्मास में 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष (निर्वाण) कल्याणक दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार से तीन दिवसीय पार्श्व प्रभु जीवन चरित्र कथा होगी।