हमारे पास जगतगुरू जैसी शक्ति, कर्मों ने उसे घेर रखा- मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा.

रतलाम, 25 जुलाई। जैसे मेढ़क उछलना जानता है लेकिन सांप को देख अपनी शक्ति भूल जाता है और सांप उसे पूरा निगल जाता है, ठीक उसी प्रकार हमारे पास भी जगतगुरू जैसी शक्ति है लेकिन हमारे कर्मों ने उसे घेर रखा है। इसी लिए हमें मोक्ष नहीं मिल पाता है। अशुभ संस्कार हमारे कर्मों को घेर लेते है, जो हमारी आत्मा में उतर जाते है। यहीं कारण है कि हम संसार में भटक रहे है और मोक्ष को प्राप्त नहीं कर रहे।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में मंगलवार को प्रवचन में कही। जगतगुरू बनना है तो पहले आप वितराग बनो। क्योकि जो वितराग है, वहीं जगतगुरू बनते है। सामने वाले के दोष देखने के बाद भी मुझे मेरे मन में दुर्भाव नहीं बनाना है, जिसकी ऐसी सोच रहती है, वही जगतगुरू बनते है। गुरू बनना है तो साधना करना पडे़गी और जगतगुरू बनना है तो मन में भावना रखना पड़ेगी। मुनिराज ने र्निदम, निर्दोष और निर्मल पर भी प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि जो अपने दम का सहारा लेते है, वह जगतगुरू नहीं बनते। जो सभी के लिए एक समान भाव रखते है, वह जगतगुरू बनते है।
मुनिराज ने पुरूषार्थ, पुण्य और प्रभाव को भी परिभाषित किया। उन्होने बताया कि जिसको संसार बहुत अच्छा लगता है, जो मोक्ष की बात नहीं करता जिसे धर्म पसंद नहीं है, वह अचर्मवत होता है। चर्मवत को संसार, धर्म और मोक्ष पसंद है, लेकिन अर्द्ध चर्मवत को सिर्फ परमात्मा पसंद हैं। यदि पुरूषार्थ करते थक जाओं तो प्रभु के चरणों में चले जाओ। इससे एक कदम आगे पुण्य है, जितना सोचो उतना मिल जाए वह पुण्य है, और जो सोचा न हो वह भी मिल जाए वह परमात्मा का प्रभाव है। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के सदस्य एवं बढ़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
236 तपस्वियों का भव्य जुलूस निकलेगा
पूज्य आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में 26 जुलाई, बुधवार को 236 वर्धमान तप करने वाले तपस्वियों का भव्य जुलूस निकाला जाएगा। इसके बाद सत्कार समारोह का आयोजन भी किया जाएगा। जुलूस सुबह 8.15 बजे सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन से आरंभ होगा और मोहन टाॅकीज पहुंचकर धर्मसभा में परिर्वतित होगा। यहां आयोजित समारोह में तपस्वियों का सत्कार किया जाएगा। कार्यक्रम के लाभार्थी ममता संजय मंडलेचा परिवार रहेगा।