

रतलाम, 29 जुलाई। मनुष्य को तीन चीजों के प्रति आसक्ति है, वस्तु, व्यक्ति और विचार। वस्तु के साथ आसक्ति हो गई या व्यक्ति के साथ अनुकूलता या फिर हमारे स्वयं के विचार के साथ। वस्तु का उपयोग करो लेकिन उसके प्रति आसक्ति मत करो। आप परिवार में गेंद की तरह रहो, मिट्टी की तरह नहीं। जितनी अधिक आसक्ति होगी उतना ज्यादा दुख होगा।
यह विचार आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में शनिवार को प्रवचन में कही। उन्होने कहा कि आसक्ति यदि शरीर में है तो चलेगा लेकिन विचारों की आसक्ति आए तो दुर्गति के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। हमें तय करना है कि हम अज्ञान में फंसे या आसक्ति में। मनुष्य को दो उपाधि मिली हैं। मैं मूड़ हूं और मूर्ख हूं। जो जानता भी नहीं और करता भी नहीं वह मूड है और जो जानता है और करता नहीं, वह मूर्ख है। जीवन में मूड़ता और मूर्खता की वजह बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मूर्खता का कारण अज्ञानता है और मूड़ता का कारण आसक्ति होती है। सारी उपाधि इन दोनों में समाहित है। मूड़ता आसक्ति की वजह से आती है और मूर्खता अज्ञानता के कारण आती है।
सैलाना वालों की हवेली में रविवार को आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में तीसरा युवा शिविर आयोजित होगा। शिविर का विषय जर्नी आफ जाय रहेगा। शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप एवं परिवार रहेगा। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक संख्या में युवाओं को शिविर में उपस्थित रहने का आव्हान किया है।