

रतलाम, 10 अगस्त। संपत्ति, साधन और सामग्री हमें सुरक्षित नहीं बनाते, बल्कि प्रभु सुरक्षित बनाते है। अनित्य भावना कहती हैं कि कुछ भी लंबे समय तक टिकने वाला नहीं है। जबकि असाधारण भावना कहती है कि अंत समय कोई साथ देने वाला नहीं है। जीवन में तीन चीजों – पुण्य का, मन का और जीवन का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन में कहीं। आचार्य श्री ने पुण्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंदिर पर लगी ध्वज को कौन सी दिशा में फिरना है, यह वह खुद तय नहीं कर सकती, उसे हवा तय करती है। हमारे जीवन की दिशा भी इसी तरह पुण्य पर टिकी है। जीवन है, तो पुण्य है। अन्यथा पुण्य की भी एक्सपायरी आएगी। आचार्य श्री ने कहा कि मन का भरोसा नहीं, पुण्य जिंदगी भर साथ दे सकता है लेकिन मन 10 मिनट भी साथ नहीं देता। जूते, कपड़े, मकान कहां रखना है यह हमें पता है लेकिन मन कैसे रखना यह किसी को नहीं पता। यदि यह साथ रहेगा तो साधना नहीं कर पाओगे। आश्रम में मन को साथ लेकर मत जाना। सांप को नचाने वाला सपेरा यदि सांप को कंट्रोल में कर लेता है तो वह उसे अपनी आजीविका बना लेता है और नहीं किया तो सांप उसे काट लेगा। ठीक उसी तरह से मन का मान लिया तो नाचोगे और अगर मन को कंट्रोल कर लिया तो उसे जीत जाओगे। आचार्य श्री ने कहा कि आदमी धरती पर बैठकर सिर्फ पैसा गिनता है, ऊपर ईश्वर सांस गिनता है। कल कितनी सांस थी और आज कितनी है। वक्त बहुत थोड़ा है और काम बहुत बाकी है, इसलिए जो करना है आज कर लो क्योकि कल किसने देखा ? तुमको पता नहीं सांस कितनी बाकी है। प्रवचन के दौरान देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।