


रतलाम। 27 अगस्त रविवार को गायत्री शक्तिपीठ ,शंकरगढ़ रतलाम शिक्षको के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया ।जो जैसा सोचता है और करता है वैसा ही बन जाता है शिक्षक वह मूर्तिकार है अबोध बच्चों को शिक्षा देकर संस्कृति संस्कार एवं श्रेष्ठ चरित्र का पाठ पढ़ाकर जीवन निर्माण में सहयोग करता है। उपरोक्त उदगार शांतिकुंज हरिद्वार प्रतिनिधि एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा इंदौर क्षेत्र के प्रमुख श्री श्रीकृष्ण शर्मा द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह में व्यक्त किए । कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर गुरुदेव माताजी ,गायत्री माता को माल्यार्पण कर स्वस्तिवाचन द्वारा किया ।
जिला समन्वयक दामोदर शर्मा द्वारा अतिथियों का परिचय दिया तथा भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक श्रवण कुमार भावसार प्राचार्य द्वारा बाजना,सैलाना,रावटी, रतलाम तहसील के परीक्षा में सम्मिलित छात्रों एवं सहयोगी शिक्षकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में विजय सिंह चौहान,नरेंद्र पाठक,शंभूलाल पाटीदार, दलवीर चौधरी,भावेश छापोला, लाला शंकर पाटीदार,मदन मोहन साहू,राजेश भाटी,गोपाल चौहान,अशोक कुमावत,रघुवीर सिंह पंवार, कांतिलाल राठौर, मुकेश टांक, डॉ शशि त्रिवेदी, मीना भावसर, डॉली साहू एवं गायत्री परिजनों, 108 शिक्षकों ने अपनी सहभागिता कि।
गायत्री परिवार ट्रस्ट नगर रतलाम के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह चौहान ने गुरुदेव द्वारा रचित अपने अंग अवयवों से एवं गीता के अठारह अध्यायों का निचोड़ अठारह लाइनों का 21वीं सदी का संविधान सत्संकल्प का वाचन किया।
गायत्री परिवार ट्रस्ट के अध्यक्ष पातीराम शर्मा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में भारतीय संस्कृति कि जानकारी देते हुए बताया हमारी संस्कृति 5000 वर्षों पुरानी है। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वय समिति के सचिव डॉ आई. पी. त्रिवेदी ने तथा आभार श्रवण भावसर द्वारा माना गया। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।