रतलाम । आचार्य श्री रामलाल जी मा सा के आज्ञानुवर्ती शासन दीपक आदित्य मुनि ने फरमाया कि विश्व संस्कृत दिवस भारत के लिए गौरव का दिवस है क्योंकि भारत की पूर्व में संस्कृत और प्राकृत भाषा ही मूल थी जो समय अनुसार हिंदी अंग्रेजी अन्य भाषा के रूप में स्थापित हो गई, संत श्री कालिदास के कई काव्य पाठ को पढ़ते हुए उनका उदाहरण देते हुए माहरसाब ने यह बताया कि अगर पूरा विश्व आज संस्कृत को जानता है तो वह भारत की ही देन है हमारे शास्त्र ,गीता, उपनिषद ऐसे कई धार्मिक पुस्तक व इतिहास आज भी साक्षी हैं की संस्कृत भाषा पूर्व के कई कालो से चलती आ रही है जिसे वर्तमान में लगभग हमारी युवा पीढ़ी ने गोन सा कर दिया। यह एक कक्षा में पढ़ाया जाने वाला मात्र सामान्य विषय की तरह ही रह गया ,जबकि यह हमारे राष्ट्रीय भाषा का मूल है विदेश में इसे पढ़ने वालों का बहुत महत्व है और संस्कृत में स्वर्ण पदक जीतने वाले लोग भी अब कम ही मिलते हैं तो हमें रक्षाबंधन जैसे पावन प्रसंग के साथ-साथ आज यह संकल्प भी लेना है कि हम संस्कृत जैसी भाषा संस्कार और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।हमेशा इन्हें प्रमोट करने में विश्वास रखना। उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि मार साहब जी द्वारा संत श्री कालिदास के जीवन देते हुए संस्कृत भाषा का मूल समझाया गया वह हमारी भाषा संस्कार संस्कृति की कक्षा के लिए प्रेरित किया इस अवसर पर अटल मुनि महाराज साहब एवं हितेशीश्रीजी महाराज साहब ने भी अपने-अपने प्रवचन में धर्म के मूल को समझाते हुए बताया कि जो प्राप्त है वहीं पर्याप्त है संतोषी सदा सुखी का मंत्र जिसने सीख लिया उसका जीवन कभी भी दुखी नहीं होगा इस भाव प्रभाव पर की भावना को जीवन में उतार कर वह अपना जीवन सुखमय बना लेगा इस अवसर पर संघ अध्यक्ष सुदर्शन जी पिरोदिया द्वारा अपने भाव रखे गए व संचालन प्रीतेश गादीया द्वारा किया गया।