

रतलाम, 31 अगस्त। जब तक कर्म सत्ता हमारे साथ है तब तक सुख मिलता रहेगा। जिस दिन वह पलट गई, उस दिन सुख भी चला जाएगा। संसार हमारा एड्रेस नहीं है, हमारा एड्रेस मोक्ष है। जिस दिन यह बात समझ में आ गई, उस दिन से आप कभी दुखी नहीं होंगे।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में कही। आचार्य श्री ने कहा कि हमारा शरीर कारखाना है, जिसमें पाप का प्रोडक्शन होता रहता है। सभी पापों का कारण शरीर है। हम इसी के लिए ही पाप करते हैं। आपके पास पाप का कारण संपत्ति है और हमारे पास शरीर है।
आचार्य श्री ने कहा कि सारा संसार पाप और पीड़ा पर चलता है। इससे मुक्त होने का एकमात्र उपाय संयम है, लेकिन संसार में यह बहुत कम है। हम कहते हैं कि यह मेरा घर है जबकि वास्तविकता यह है कि हम हमारे घर में भी गेस्ट हैं। यह संसार मुसाफिरखाना है। हमें यह सोचना चाहिए कि मैं इस घर का मालिक नहीं, मेहमान हूं। इस वाक्य को हमें रोज दोहराना चाहिए।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे।