- श्रावक-श्राविकाएं स्वधर्मियों से बोले हम तो तपस्या कर रहे आप क्या कर रहें
- आदिनाथ सोसायटी के पारख धर्मसभा मण्डप में कल से पर्युषण पर्व का आगाज

पूना, 11 सितम्बर। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का मंगलवार से आगाज हो रहा है। चारों गतियों से मुक्त होने की तमन्ना है तो इससे जुड़ना बहुत जरूरी है। ये ऐसा महापर्व है जो हमे बहुत शीघ्र मुक्ति के मार्ग तक पहुंचा सकता है। ऐसे महान पर्व की आराधना तप-त्याग, जप, साधना, स्वाध्याय के साथ सभी को परिवार सहित करने का प्रयास करना है। जब तक हम संसार के पास है रोना बंद नहीं हो सकता जैसे ही संतों के पास आएंगे रोना बंद हो जाएगा। ये विचार पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख धर्मसभा मण्डप में सोमवार को श्रमणसंघीय वरिष्ठ सलाहकार सुमतिप्रकाशजी महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने सभी को पर्युषण पर्व का आगाज तपस्या के साथ करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि परिवार या कोई अन्य विचलित करने का प्रयास करेगा लेकिन अपने को व्रज की तरह मन को मजबूत रख तपसाधना में जुटना है। घरवाले हो या स्वधर्मी बंधु उन्हें बोल दे मैं तो तपस्या कर रहा/रही हूं आप क्या कर रहे है। अपना संकल्प व्रज जैसा मजबूत होगा तो इन आठ दिन में धर्म आराधना करने से कोई नहीं रोक पाएगा। मुनिश्री ने कहा कि राजा जनक की सभा में शक्ति का शिवधनुष तो एक ही राम उठा पाए लेकिन यहां पर्युषण में तपस्या का धनुष रखा हुआ है अपनी धर्मसभा में ऐसा कोई व्यक्ति न रहे जो राम नहीं बन पाए। सभी को राम बन तपस्या का धनुष उठाना है। समकितमुनिजी ने कहा कि धर्म आराधना यथाशक्ति होनी यथामति नहीं। जो कहते हमने एक-दो अठाई या उससे बड़ी तपस्या कर ली वह यथामति वाले है यानि उनमें शक्ति तो है लेकिन उनका मन कहता है कि तपस्या कर ली अब करके क्या करना। ज्ञानीजन कहते है कि साधना तब तक करते रहो जब तक आत्मा कर्मो से मुक्त नहीं हो जाए। साधक तब तक तपस्या करते रहते जब तक शरीर जवाब नहीं दे जाए। आपके शरीर में शक्ति है तो हर वर्ष अठाई करते रहो। जितना तप त्याग, धर्म आराधना करते रहेंगे उतने जल्दी चारों गतियों से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ेगे। जो जिनवाणी की नहीं मानेंगे उन्हें चारों गतियों में घूमते रहना है। धर्मसभा में गायनकुशल जयवंत मुनिजी म.सा. ने पर्युषण शुरू होने से पूर्व प्रेरणादायी भजन ‘‘पर्युषण आया है ये खुशियां लाया है’’ की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा., सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा.,सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। पर्युषण अवधि में सुबह 8.30 बजे से अंतगढ़ सूत्र का वाचन एवं सुबह 9 बजे से प्रवचन होगा। प्रतिदिन दोपहर में आगम आराधना के साथ विभिन्न प्रतियोगिताएं भी होगी। आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी 18 सितम्बर तक प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है।
बिना बैकअप प्लान उड़ जाए तपस्या के आसमान में
प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि आपको तपस्या के आसमान में उंची उड़ान भरनी है तो नीवी, बियासना, एकासन जैसे जो बैकअप प्लान ले रखे है उनको हटाना होगा। उन्हें हटाए बिना आप तपस्या के आसमान में खुली उड़ान नहीं भर पाएंगे ओर आपका मन तपस्या करने की बजाय इन बैकअप प्लान में ही अटका रहेगा। बैकअप प्लान जोखिम से बचने के लिए होता है पर कई बार ये कमजोरी भी बन जाता है। पर्युषण में अठाई करने की भावना रखे ओर प्रतिदिन 11 सामायिक करने का लक्ष्य रखे।
पर्युषण का आगाज करें त्याग तपस्या के साथ
आगम मर्मज्ञ समकितमुनिजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास के दौरान 12 से 19 सितम्बर तक मनाए जाने वाले पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की तैयारियां सभी ने पूरी कर ली होगी। पर्युषण 90 महान आत्माओं के सिद्ध होने का उत्सव है। यह अपने लिए सिद्ध भगवंतों का उत्सव है। सुबह बिना प्रवचन सुने कोई अपने व्यापार-कामकाज पर नहीं जाए इसकी प्रेरणा परिवार के सभी सदस्यों को मिले। पर्युषण में उपवास की अठाई पर डायमण्ड, आयम्बिल की अठाई पर गोल्डन व एकासन की अठाई करने की भावना रखने वाले को सिल्वर कूपन दिया जा रहा है। इसी तरह पर्युषण पर्व के दौरान 108 सामायिक पर डायमण्ड, 81 सामायिक पर गोल्डन एवं 51 सामायिक करने की भावना रखने वालों को सिल्वर कूपन दिया गया है। समकितमुनिजी ने कहा कि पर्युषण के ये आठ दिन सिर्फ धर्म ओर परमात्मा की आराधना के लिए होने चाहिए। हमारा अधिकाधिक समय तप,त्याग व साधना में व्यतीत होने चाहिए।
पर्युषण पर्व के स्तवन की लॉचिंग
धर्मसभा में पर्युषण पर्व के लिए तैयार स्तवन (गीत) ‘‘ये पर्व है प्यारा’’ की लॉचिंग की गई। इस स्तवन को गायक सुमित संचेती ने अपना स्वर प्रदान किया है। इस स्तवन को तैयार कराने में प्रायोजक नितिन,सचिन,राहुल टांटिया एवं परिवार रहे। लॉचिंग के अवसर पर गायक संचेती एवं प्रायोजक टांटिया परिवार का श्री आदिनाथ संघ की ओर से सम्मान किया गया। पूज्य समकितमुनिजी ने इस गीत को तैयार करने वाले गायक सुमित संचेती की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके लिए मंगलभावनाएं व्यक्त की। गौरतलब है कि सुमित संचेती ने ही हाल ही सम्पन्न प्रवचनमाला कहानी द्रोपदी की-कहानी कर्म की के गीत को स्वर दिया था। अब वह 25 सितम्बर से शुरू होने वाली प्रवचनमाला कहानी चेलना रानी के लिए भी गीत तैयार करने में जुटे हुए है। उक्त जानकारी सचिन रमेशचन्द्रजी टाटिया अध्यक्ष, आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट, पूणे तथा निलेश कांठेड़ मीडिया समन्वयक,समकित की यात्रा-2023 ने दी।