हर आत्मा में छुपा है परमात्मा -आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा

छोटू भाई की बगीची में प्रवचन

रतलाम,21 सितंबर। मानव भव में कहां से आया और आगे कहां है मुकाम, इन दो बातों पर ही हमारा सारा दर्शन टिका हुआ है। संसार में व्यक्ति ज्ञान तो बहुत पाता है, लेकिन खुद को भूल जाता है। प्रमाद, अज्ञान और मोह को नहीं समझने के कारण ही सब चैरासी में घूम रहे है। सब अपनी संभावनाओं को जाने। हर आत्मा में परमात्मा छुपा हुआ है।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि बीज की संभावना वृक्ष, बूंद की संभावना सागर और किरण की संभावना प्रकाश होता है। इन संभावनाओं का ज्ञान जिसे होता है, वह अपना लक्ष्य पा लेता है। हर आत्मा में परमात्मा बनने की क्षमता है और सत्संग इस क्षमता को जानने का माध्यम है। सत्संग के जरिए अपनी संभावनाओं का बोध होता है। इसलिए सत्संग में अवश्य जाना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि संभावना को जानने वाला ही निष्ठावान बनता है। इसके लिए आस्था जरूरी है। आस्था से विश्वास पैदा होता हैं और विश्वास निष्ठा से आता है। हर व्यक्ति को धर्म के प्रति निष्ठावान बनना चाहिए। धर्म है, तो सबकुछ है, यदि ऐसी निष्ठा पैदा हो जाए, तो आत्म कल्याण होने में कतई देर नहीं लगेगी।
आरंभ में श्री विशालप्रिय मुनिजी मसा ने उत्तराध्यन सूत्र का वाचन किया। उपाध्याय प्रवर श्री जितेश मुनिजी मसा ने आचारंग सूत्र के माध्यम से जीवन के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। इस मौके पर महासती श्री पारसकुंवर जी मसा ने 5 उपवास, अनिता रांका ने सिद्धी तप की लडी में 8 उपवास और प्रांजल पटवा ने 8 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।
आचार्य प्रवर ने सर्वाधिक 1018 प्रतिशत बढाया संयम परिवार
प्रवचन में मुंबई से आए समग्र जैन चातुर्मास सूची के प्रकाशक बाबूलाल जैन उज्जवल ने भाव व्यक्त किए। उन्होंने दावा किया कि आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा वर्ष 1996 में 11 संत-सतिया के साथ थे और वर्ष 2023 में इनकी संख्या बढकर 29 संत और 94 सतियाजी सहित 123 है। आचार्यश्री ने 28 वर्षों में संयम के परिवार को 112 संत-सतियाओं के साथ 1018 प्रतिशत बढाया, जो देश में सर्वाधिक है। छोटू भाई की बगीची में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए श्री उज्जवल ने जानकारी दी कि वर्तमान में समग्र जैन समाज में कुल 18,301 साधु-साध्वियां है। इनमें 11525 श्वेताम्बर मूर्ति पूजक, 4254 श्वेताम्बर स्थानकवासी 1794 दिगम्बर एवं 729 श्वेताम्बर तेरापंथी है। उनके द्वारा प्रतिवर्ष इन संतों के चातुर्मास की जानकारी का प्रकाशन किया जाता है।