उपकार किसी ने भी किया हो, उसे कभी मत भूलो- मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा.

रतलाम, 5 अक्टूबर। जीवन में सब कुछ भूल जाओ तो चलेगा लेकिन उपकारियों द्वारा किए गए उपकार को कभी मत भूलना। उपकारियों के प्रति मन में हमेशा कृतज्ञता का भाव होना चाहिए। माता-पिता और गुरू हमेशा पूजनीय है। माता-पिता द्वारा हम पर किए गए उपकारों के लिए आठ प्रकार- जल पूजा, चंदन पूजा, पुष्प पूजा, धूप पूजा, दीपक पूजा, अक्षत पूजा, नेवैद्य पूजा और फल पूजा करना चाहिए।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में माता-पिता की पूजन के महत्व को वर्णित करते हुए कहा कि माता-पिता को कभी किसी प्रकार से पीड़ा न पहुंचाते हुए उनके गुणों की जानकारी सबको देना चाहिए। आज हम जो कुछ भी है, वह उन्ही के कारण है। माता-पिता की सम्पत्ति का भी हमे त्याग करना चाहिए। क्योकि उन्होने हमे इस काबिल बनाया है कि स्वयं सब कुछ कर सकते है।
मुनिराज ने कहा कि माता-पिता हमारे लिए खूब जले तब जाकर आज हम यहां खडे़ है। पिता दिनभर बच्चे के लिए धूप में तपता है तो माता चूल्हे पर। इनके द्वारा अपने बच्चों के लिए सर्वत्र न्यौछावर कर दिया जाता है। इन्ही कारण से वह पूजनीय है। हमे उनके जीवन को इन आठ तरह की पूजा के माध्यम से धन्य करना होगा। माता-पिता की हर बात को स्वीकार करें और उनके साथ अच्छा व्यवहार कर बात करें। वर्तमान दौर में श्रवण सबको पसंद है लेकिन श्रवण बनना कोई नहीं चाहता है।
रविवार को होंगे विशेष प्रवचन
सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. की निश्रा में रविवार, 8 अक्टूबर को ओह गाॅड वाय मी विषय पर विशेष प्रवचन प्रातः 9.15 से दोपहर 12.15 बजे तक होंगे। इस अवसर पर मुंबई के संगीतकार जैनम वारैया सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा अधिक से अधिक संख्या में धर्मालुजनों से उपस्थित रहने का आव्हान किया है।