तीन दिन राजभवन में बिताए अनुभवों पर आधारित विशेष लेख


चित्तौड़गढ़ । पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अपनी कार्यशैली से यह स्थापित किया है कि संवैधानिक पद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनसेवा का प्रभावी माध्यम भी हो सकता है। मेवाड़ की माटी में जन्मे और संघ के संस्कारों में पले-बढ़े कटारिया ने “महामहिम” की पारंपरिक छवि से आगे बढ़ते हुए स्वयं को आमजन के बीच एक सहज, संवेदनशील और सक्रिय जनसेवक के रूप में स्थापित किया है।
चित्तौड़गढ़ अर्बन बैंक चेयरमैन डॉ. आई. एम. सेठिया एवं पूर्व चेयरपर्सन एडवोकेट विमला सेठिया को तीन दिन तक राजभवन में उनके साथ रहने का अवसर मिला। इस दौरान चंडीगढ़ से लेकर अमृतसर व भारत-पाक सीमा स्थित वाघा बॉर्डर तक आमजन, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से संवाद में एक ही बात उभरकर सामने आई—कटारिया सादगी, संवेदनशीलता और सक्रिय प्रशासन का सशक्त उदाहरण हैं।
लगभग 81 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा उल्लेखनीय है। वे प्रतिदिन प्रातः जल्दी उठकर राजभवन परिसर में 4-5 किलोमीटर मॉर्निंग वॉक करते हैं। इसके पश्चात पक्षियों को दाना डालना और देवदर्शन-पूजन उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है। उनके साथ प्रातः भ्रमण के दौरान यह अनुभव हुआ कि उनकी स्फूर्ति किसी युवा से कम नहीं है—यहाँ तक कि सुरक्षा अधिकारी भी उनके साथ पूरी सक्रियता से तालमेल बनाए रखते हैं।
कार्यालयीन कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी उतनी ही उल्लेखनीय है। प्रातः लगभग 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक वे निरंतर प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। सचिवालय में जनसुनवाई के दौरान 11 प्रकरणों की समीक्षा मुख्य सचिव की उपस्थिति में की गई, जहाँ समस्याओं के समाधान हेतु उन्होंने तत्परता से अधिकारियों को निर्देश दिए।
इसी क्रम में चंडीगढ़ के मुख्य बाजार में एक आपराधिक घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल उच्च अधिकारियों से चर्चा कर अगले ही दिन कानून-व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यह उनकी त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासनिक सजगता का स्पष्ट उदाहरण है।
राजभवन के किचन स्टाफ से लेकर कार्यालय कर्मियों तक, सभी ने उनकी कार्यशैली और धर्मपत्नी अनीता कटारिया के आत्मीय व्यवहार की सराहना की। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय में पहली बार उन्होंने ऐसा राज्यपाल देखा है, जो आमजन के दुख-दर्द को वास्तव में अपना मानकर समाधान हेतु प्रयासरत रहता है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उनकी निर्णय क्षमता, कार्यकुशलता और मानवीय दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
चंडीगढ़ के बाजारों में व्यापारियों और आम नागरिकों से संवाद में भी यही भावना सामने आई कि राज्यपाल की सहजता और उपलब्धता ने लोगों का विश्वास जीता है। आम व्यक्ति बिना झिझक अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुँचता है और उसे विश्वास रहता है कि उसकी बात सुनी जाएगी।
युवा वर्ग को नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने हेतु उनकी पहल और आमजन के बीच लगातार संवाद उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देते हैं, जो निरंतर जनचर्चा का विषय बनी हुई है।
निश्चित रूप से, गुलाब चंद कटारिया का यह कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि सादगी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ किया गया नेतृत्व किसी भी संवैधानिक पद को जनसेवा का जीवंत माध्यम बना सकता है। उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली आमजन के मन में एक स्थायी छाप छोड़ रही है।
लेखक के रूप में यह व्यक्तिगत अनुभव भी विशेष रहा कि एक कार्यकर्ता के प्रति उनके द्वारा प्रदत्त आत्मीय व्यवहार और सम्मान जीवन भर स्मरणीय रहेगा।