आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की 16 दिन की सुरिमंत्र साधना के बाद बुधवार को महामांगलिक

रतलाम, 10 अक्टूबर। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की 16 दिन की सुरिमंत्र की साधना 11 अक्टूबर को पूर्ण हो रही है। सूरिमंत्र की अखंड साधना पूर्ण कर वे बुधवार को 8.30 बजे महामांगलिक श्रवण करायेंगे। इसके पूर्व 8.15 बजे से सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन से गाजे-बाजे के साथ आचार्य श्री की निश्रा में सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज तक भव्य जुलूस निकलेगा। इसमें मुंबई का सुप्रसिद्ध बुद्धि सागर बैंड सुर बिखरेगा।
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधि विजयजी म.सा. ने बताया कि महामांगलिक के बाद सेठजी का बाजार स्थित आगमोद्धारक भवन पर की गई सुरिमंत्र साधना का पवित्र वासक्षेप प्रदान करेंगे। कार्यक्रम के बाद साधर्मिक भक्ति होगी। सुरिमंत्र साधना मंदिरम सुबह 11 से शाम 6 बजे तक दर्शन हेतु खुला रहेगा। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी ने सकल जैन श्री संघ एवं समस्त धर्मालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आव्हान किया है।
मंगलवार को मुनिराज ने प्रवचन में कहा कि यदि मनुष्य भव में आपके जीवन में सरलता, समता और सातविकता आ गई तो आप अपने आप परमपद तक पहुंच जाएंगे। क्योकि उक्त स्थानों को पाने के लिए इन तीनों का होना बहुत आवश्यक है। प्रभु के जीवन में भी यहीं तीन गुण है। यदि यह हमारे भीतर आ जाएंगे तो हमारा भी कल्याण होगा। यह तब ही संभव है जब परमात्मा से हमारा लगाव रहे।
मुनिराज ने कहा कि आज हम प्रभु को छोड़कर इधर-उधर भागते रहते है, जबकि हमे एक दिन भी प्रभु को नहीं छोड़ना चाहिए। उनके साथ से ही भव को पार कर सकते है। इसके विपरीत हम प्रभु से दूर होते है तब हमारी आंख से आंसू नहीं आते है लेकिन पैसे और संबंधों के कारण हमारी आंखें भीग जाती है।