छोटू भाई की बगीची में प्रवचन
रतलाम,13 अक्टूबर। निराशा, निर्बलता और पराजय का कारण होती है। निराशा से व्यक्ति निर्बल होता है, तो आशा उसे बलवान और उर्जावान बनाती है। आशावान ही जीवन में सबलता और सफलता प्राप्त करते है। संसार में सबल लोग ही निर्दोष हो सकते है, निर्बल व्यक्ति कभी निर्दोष नहीं बन सकता।
यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि निर्बल सभी दोषों का शिकार होता है। लेकिन सबल उन्हें जीत लेता है। हमारा धर्म निर्बल बनने की इजाजत नहीं देता, अपितु सबको सबल बनाता है। मन और तन से जो निर्बल होते है, वे आत्मा से भी होते है। आत्मा को सबल बनाने के लिए तन और मन से सबल होना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि वर्तमान में निराशावाद घर-घर में फैल रहा है, जिससे व्यक्ति निर्बल और कमजोर बन जाता है। हमारी आत्मा में अनंत शक्तियां है। अपने अनंत ज्ञान, दर्शन, चारित्र और आनंद की शक्ति को हम पहचानते नहीं, इसलिए खुद को निर्बल बना लेते है। निराशा तथा निर्बलता बहुत बडा खतरा है, इनसे सत्संग एवं स्वाध्याय हमे इससे बचाते है। सत्संग और स्वाध्याय कर खुद को सबल बनाना चाहिए, जिससे सारे दोषों को दूर किया जा सके। सबल व्यक्ति ही कर्मों के दोषों पर विजय पाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जब तक हमारा पुण्य उदय में होता है, तब तक ही सुख-सुविधा रहती है, अन्यथा पुण्य जब भी पाप में बदलता है, तो अमीर, गरीब और करोडपति, रोडपति बन जाता है। हर पल आशावान बने रहने वाला कभी निर्बल नहीं होता, इसलिए परमात्मा का विश्वास करते हुए सदैव आशावान बने रहना चाहिए।
आरंभ में उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने आत्मदोष और आत्मगुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। महासती श्री इन्दुप्रभाजी मसा ने 25 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इंदौर से आए चेतन भाई देसाई और सुशील भंडारी ने आचार्यश्री ने इंदौर प्रवास की विनती की। संचालन हर्षित कांठेड द्वारा किया गया।