जगत में कोई मेरा नहीं और कुछ भी मेरा नहीं है, यहीं जीवन का सूत्र- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

रतलाम,19 अक्टूबर। मनुष्य का स्वभाव होता है कि वह हर चीज को लेकर मेरा-तेरा करता रहता हैं। कभी किसी व्यक्ति को वह अपना बताता है तो कभी कोई वस्तु अपनी होने की बात कहता है लेकिन असल जिंदगी में इस जगत में कोई भी मेरा नहीं है और कुछ भी मेरा नहीं है, जीवन के इस सूत्र को समझने की जरूरत है। जिसने इस सूत्र को अपना लिया उसका कल्याण होगा। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने गुरूवार को सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन के दौरान कहीं। आचार्य श्री ने कहा कि बिना किसी कारण के हर व्यक्ति मेरा-तेरा में लगा हुआ है। हमें न किसी व्यक्ति और न वस्तु को अपना मानना चाहिए। यदि कोई आपका हो सकता है तो वह सिर्फ परमात्मा है। उनकी भक्ति करो और फिर देखा क्या होता है। आचार्य श्री ने कहा कि परिवार का कोई व्यक्ति चला जाता है या किसी का जन्म होता है,तो हम धार्मिक स्थलों पर जाना और धर्म आराधना करना छोड़ देते है लेकिन कभी कोई व्यक्ति बाजार जाना, दुकान खोलना या खाना नहीं छोड़ता है। सुख हो या दुख हमे प्रभु की भक्ति ओर ज्यादा करना चाहिए। आचार्य श्री ने प्रवचन के दौरान संयोग संबंध, तादात्म संबंध और स्वरूप संबंध को परिभाषित करते हुए कहा कि एकमात्र स्वरूप का संबंध ही ऐसा है जो कभी बदलता नहीं है, बाकी सब बदल जाते है। दुनिया संबंध संयोग है। यह नष्ट होने पर व्यक्ति दुखी होता है। प्रवचन में बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित रहे। विशिष्ट प्रवचन श्रेणी का आयोजन होगा श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी के तत्वावधान में 20 अक्टूबर से 9 दिवसीय विशिष्ट प्रवचन श्रेणी का आयोजन होगा। इसमें आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. विभिन्न विषयों पर प्रवचन देंगे। प्रवचन सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रतिदिन सुबह 9 से 10.15 बजे तक होंगे।

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