मन की शांति के लिए प्रभु भक्ति आवश्यक- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

रतलाम, 28 अक्टूबर। जीवन में भले ही करोड़ों रूपए आपको मिल जाए। लाखों की गाड़ी, घर मिल जाए लेकिन यदि आपके मन को शांति न मिले तो इन चीजों का जीवन में कोई महत्व नहीं है। मन की शांति के लिए प्रभु की भक्ति आवश्यक है। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने शुक्रवार को सैलाना वालों की हवेली मोहन टाॅकीज में आयोजित विशेष प्रवचन माला में कही।
आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य से व्यक्ति को धन, निरोगी शरीर, यौवन, होशियारी, मन पसंद सुंदरी मिल जाए तो वह मालामाल हो जाता है लेकिन मोक्ष मार्ग के लिए चित्त की प्रसन्नता मिलना अत्यंत आवश्यक है। सब कुछ हो और मन प्रसन्न न हो तो इन सब चीजों के होने का कोई महत्व नहीं है। इसलिए मन की प्रसन्नता तो जीवन में होना ही चाहिए। चित्त की प्रसन्नता मिलने पर ही मन पसंद मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
आचार्य श्री ने विशेष प्रवचन में श्रीपाल-मयणा के प्रसंग को व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीपाल को मयणा के साथ संयोग हो गया था। इससे श्रीपाल का मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो गया। हमारे जीवन में मन पसंद मार्ग नहीं, मोक्ष का मार्ग होना चाहिए। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
रविवार से आरंभ होगा पुणिया श्रावक सामायिक ग्रुप
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में रविवार से आगमोद्धारक भवन सेठजी का बाजार में भाईयों के लिए पुणिया श्रावक सामायिक ग्रुप होगा। इसमें प्रभावना के लाभार्थी गणतंत्रजी कल्याणमलजी मेहता रहेंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी ने अधिक से अधिक सामायिक करके पुण्य कमाने का आव्हान किया है।

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