सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन -आत्म तत्व का ज्ञान हो जाए तो जीवन धन्य हो जाएगा- आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा.

रतलाम, 2 नवम्बर। बोरिंग एक बार खाली हो सकता है लेकिन कुआ कभी खाली नहीं होता है। होल के पास उधार का पानी होता है जबकि कुएं के पास नहीं। अभिव्यक्ति हमेशा कुएं जैसी रहती हैं। शरीर भी अशुची का भाव है। संसार चाहे कितना भी खराब हो, लेकिन पुण्य की वजह से वह हमेशा अच्छा लगता है। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रवचन देते हुए कही। आचार्य श्री ने भावना के छह प्रकार अनित्य भावना, अशरण भावना, संसार भावना, एकत्र भावना, अनयत्र भावना और अशुची भावना का वर्णन करते हुए कहा कि शरीर कितना खराब हो, चमड़ी के कारण अच्छा लगता है। यदि हमे आत्म तत्व का ज्ञान हो जाए तो जीवन धन्य हो जाएगा। आत्मा पर कर्मों का आवरण है इसलिए वह गंदा है। बाहरी आवरण हट जाए,तो बहुत सुंदर होगा। आचार्य श्री ने कहा कि हमारा शरीर दुर्जन जैसा है। दुर्जन को सज्जन की कभी कद्र नहीं होती, चाहे सज्जन ने उस पर कितने ही उपकार किए हो। संत का स्वभाव हमेशा करुणा का होता है। दुनिया की फैक्टरी में कितना ही बेकार डालो तो बेस्ट निकलता है लेकिन हमारा शरीर ऐसा नहीं है। जब तक हमारी नजर फोटो की रहेगी तब तक राग होगा। हमारा शरीर अस्वच्छ है, अस्थिर है और इसका कोई भरोसा भी नहीं है। यह सबको समझ लेना चाहिए। प्रवचन में श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी पदाधिकारी और सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

Play sound