जीवन की सारी सकारात्मकता को खत्म कर देता है गुस्सा – आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी म.सा.

रतलाम 1 दिसम्बर 2023। अधिक खाना, अनुपयुक्त खाना रोगों का खुला आमंत्रण होता है। पहले से ही कंट्रोल रखा जाए तो रोगों से अपना बचाव हो जाता है। गम वह नहीं खाता जो गुस्से में जीता है। गुस्सा बहुत बड़ा खतरा है जो जीवन की सारी सकारात्मकता को खत्म कर देता है। उक्त बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युग पुरूष, आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी म.सा. ने कही। स्टेशन रोड स्थित पगारिया हाऊस में शुक्रवार को प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि गुस्से से बचाव का उपाय है गम खाना। जो बलवान और बुद्धिमान होता है वही गम खाते है। कायर और कमजोर कम नहीं खा सकते। गुस्सा ही सारे दोषों का सिर मौर है। गुस्से में हिंसा, झूठ, चोरी, अन्याय, अत्याचार सारे पाप होते है। गम खाने वाला गुस्से के खतरे से अपना बचाव करता है। इसी तरह दुःख और दुर्गति से अपना बचाव करने वाला नम जाता है और अपने में रम जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि बचाव तब किया जाता है जब खतरा सामने हो। मानव जीवन खतरों के सामने खड़ा है। हर समय यहां कोई न कोई खतरा मंडराता ही रहता है। रोग का खतरा हो तो उसके बचाव के लिए कम खाना, दोष का खतरा हो तो उसके बचाव के लिए गम खाना, दुःख का खतरा हो तो उसके बचाव के लिए नम जाना और दुर्गति का खतरा हो तो उसके बचाव के लिए अपने में रम जाना। ये चार खतरे है और इनसे बचाव के ये चार उपाय है। बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। आचार्य ने कहा कि आज का इंसान खतरों को खतरा मानता ही नहीं, जब खतरे सामने होते है तब उसे होश आता है तब तक समय निकल जाता है। फिर बचाव का कोई उपाय हो नहीं पता, पहले से ही सजग जागरूक रहना चाहिए। इस अवसर पर उपाध्याय श्री जितेशमुनिजी ने कहा कि मोह का कोई एक रूप नहीं होता, वह समय और अवसर के साथ अपने रूप बदलता रहता है। मोह के त्यागी बनो। 2 दिसम्बर को भी आचार्यश्री के प्रवचन स्टेशन रोड स्थित पगारिया हाऊस में आयोजित किए गए है। धर्मसभा का संचालन अशोक तरसिंग ने किया।